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आतंकी संगठनों में आतंक का आका बनने की होड़

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जम्मू। कश्मीर में हो रही टारगेट किलिंग का श्रेय लेने के लिए आतंकी संगठनों में होड़ लगी हुई है। पाकिस्तान की नजरों में हीरो बनने के लिए कई नए संगठन सक्रिय हो गए हैं। टारगेट किलिंग और पुंछ में हुए सेना पर हमले के लिए टीआरएफ और पीएएफएफ दावा कर चुके हैं। जबकि कश्मीर में टारगेट किलिंग के लिए टीआरएफ, गिलानी फोर्स, गजवत-उल-हिंद भी दावा कर चुके हैं। ये संगठन जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से सक्रिय हुए हैं। इसके पहले कश्मीर में स्थानीय आतंकियों का हिबजुल मुजाहिदीन इस्तेमाल करता था।
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जिस तरह इस समय गैर कश्मीरी नागरिकों और अल्पसंख्यक कश्मीरी पंडितों, सिखों को निशाना बनाया जा रहा है, ठीक इसी तरह से तीन साल पहले हिजबुल के आतंकी पुलिस कर्मियों के परिवारों को निशाना बनाते थे। उनका अपहरण कर हत्या कर देते थे। यहां तक धमकी दे दी गई थी कि यदि पुलिस आतंकियों के परिवारों को तंग करेगी, उसी तरह से पुलिस के परिवारों को तंग किया जाएगा। लेकिन सुरक्षाबलों ने कश्मीर में हिजबुल की कमर तोड़ डाली।
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तीन साल पहले कश्मीर में
सक्रिय हिजबुल का खात्मा
तीन साल पहले कश्मीर में हिजबुल के लिए काम करने वाले 200 से ज्यादा आतंकी सक्रिय थे। लेकिन अब हिजबुल का न कोई आका है और न ही इनके लिए काम करने वाले। हिजबुल की तरह ही अब टीआरएफ, पीएएफएफ, गिलानी फोर्स और गजवत-उल-हिंद लोगों को निशाना बना रहे हैं। पीएएफएफ तो हिजबुल की तरह ही अपने वीडियो बनाकर पोस्ट कर रहा है। जबकि बाकी संगठन भी सोशल मीडिया के जरिये खुद को कश्मीर में आतंक के आका बता रहे हैं। एक समय हिजबुल से अलग होकर जाकिर मूसा ने अलग संगठन बनाया था। इसी तरह अब भी आतंकी संगठन अलग-अलग तंजीमें बनाकर कश्मीर में आका बनने का प्रयास कर रहे हैं।
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