इसी दौरान इलाके में एक चाय की दुकान जिसे बिहार का एक शख्स चलाता है उसके बाहर कुछ गैर स्थानीय मज़दूर खड़े दिखे। वो चाय की चुस्कियां और पकोड़े खा रहे थे कि अचानक से वहां से एक बख्तरबंद वाहन को आता देख उनमें हड़बड़ाहट मच गई। साईरन बजाते हुए और ऊपर लाल बत्ती जलाते हुए यह सीआरपीएफ का वाहन आहिस्ता आहिस्ता इलाके से गुज़रा। यह संकेत था गैर स्थानीय मज़दूरों के लिए कि वह अंदर चले जाएं।
वहां खड़े एक पेंटर प्रकाश जोकि सुपौल बिहार से हैं ने कहा, कल हमें पुलिस के कुछ लोगों ने कहा कि शाम के समय बाहर न घूमें। जो शाम को निकलता है सब्जी लेने या किसी और काम से उसे अंदर जाने को कहा जाता है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, यह हमारी सुरक्षा के लिए किया जा रहा है। डर किसे नहीं लगता साहब, सबको अपनी जान प्यारी है। बेतिया के एक अन्य मजदूर दीना लाल ने कहा, ऐसा पहली बार नहीं हो रहा।
जब कभी भी गैर स्थानीय लोगों की निशाना बनाया जाता है तो पुलिस द्वारा इस प्रक्रिया को दोहराया जाता है। अगर डर गए तो दो वक्त की रोटी कैसे कमाएंगे इसलिए अभी यहां ठीके हुए हैं। जब लिखा होगा किस्मत में तब मौत आएगी ऐसे डरने से क्या हो सकता है। लेकिन इंसान है कभी-कभी थोड़ा डर जरूर लगता है।और यह महसूस होता है कि आखिर हमें ही क्यों निशाना बनाया जाता है। हमने क्या बिगाड़ा है किसी का। अपनी रोजी कमाने आते हैं बस।
गौरतलब है कि मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के गगनगीर में हुए आतंकवादी हमले में कुल सात लोग मारे गए जिसमें बड़गाम जिले के एक डॉक्टर शामिल थे जबकि बाकी गैर स्थानीय मजदूर थे जो आतंकवादियों की गोलियों का निशाना बने। इस बीच सूत्रों की मानें तो इस हमले को दो पाकिस्तानी आतंकवादियों ने अंजाम दिया है जो हथियारों से लैस थे।
इसकी जिम्मेदारी आतंकवादी संगठन टीआरएफ द्वारा लिया गया है। हालांकि इस हमले के बाद जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हमले को अंजाम देने वाले आतंकवादियों को अपने अंजाम तक पहुंचाने के लिए खुली छूट दी गई है।
वहीं इस बीच ऐसे हालात केवल श्रीनगर में ही नहीं बल्कि कश्मीर घाटी में हर उस जगह पर देखने को मिल रहे हैं जहां-जहां गैर स्थानीय मजदूर अपना डेरा जमाए बैठे हैं।
पुलिस द्वारा उन इलाकों में एहतियात बरता जा रहा है। शाम के समय मजदूरों से बाहर घूमने से परहेज करने के निर्देश दिए गए हैं और उनसे किसी तरह की संग्दिग्ध हरकत देखने पर पुलिस को सूचित करने को भी कहा गया है। इसके अलावा पुलिस, सीआरपीएफ और सेना द्वारा उन इलाकों में भी गश्त बढ़ा दी है जहां अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी रहते जहां। इतना ही नहीं सेना द्वारा इन इलाकों में रात के समय एरिया डोमिनेशन पेट्रोल भी अंजाम दी जा रही है ताकि आतंकवादियों के मंसूबों को नाकाम बनाया जा सके। कुल मिलकर कहें तो आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए विशेष मोड्स ऑपरेंडी को प्रभावी ढंग से ज़मीनी स्तर पर अंजाम दिया जा रहा है।