हमलावरों, जो पाकिस्तान के आतंकवादियों के रूप में पहचाने गए हैं, ने योजना बनाने से पहले स्थल के लेआउट का बारीकी से अध्ययन किया। उन्होंने पहले श्रमिकों के मेस को निशाना बनाया और फिर अधिकारियों के क्वार्टर की ओर बढ़े। अधिकारियों का मानना है कि हमलावरों को स्थल के बारे में पूर्व में जानकारी थी, संभवतः वे पहले वहा काम कर चुके थे या वहां मौजूद स्थानीय लोगों से सहायता प्राप्त की थी। घटना के गवाहों ने हमलावरों द्वारा की गई निर्दयता से भरी फायरिंग की बात की।
अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। इस बर्बर कृत्य की जिम्मेदारी प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े प्रतिरोध मोर्चा नामक एक छायादार संगठन ने ली है। तीन दशकों से आतंकवाद से ग्रसित इस क्षेत्र में इससे पहले ऐसा हिंसक घटना नहीं हुई थी। यह हमला तब हुआ जब स्टाफ रात में टनल प्रोजेक्ट पर काम करने के बाद अपने कैंप में लौट रहा था। मृतकों में डॉ. शाहनवाज डार, फहीम नसीर, कलीम, मोहम्मद हनीफ, शशि अबरोल, अनिल शुक्ला और गुरमीत सिंह शामिल हैं।
एनआईए की जांच टीम घटनास्थल पर गई थी ताकि महत्वपूर्ण सबूत इकट्ठा कर सके जो हमलावरों की पहचान में मदद कर सके। विभिन्न राजनीतिक पार्टियों और संगठनों के नेताओं ने इस हमले की निंदा की है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने क्षेत्र की प्रगति और विकास में बाधा डालने वाले स्वार्थी तत्वों को नकारने का संकल्प लिया है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस बर्बर हमले का बदला लेने की बात करते हुए पाकिस्तान को इस क्षेत्र में हिंसा भड़काने के लिए जिम्मेदार ठहराया।