कांग्रेस छोड़ प्रदेश के सभी दलों ने बनाई दूरी, महबूबा ने मांगा अनुच्छेद 370 तो बुखारी ने कहा टकराव नहीं, सुलह चाहिए
- भाजपा करेगी सचिवालय घेराव, स्टेटहुड की आड़ में सियासत का आरोप
अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर उमर सरकार के प्रदर्शन से पहले घाटी की सियासत गरमा गई है। एनसी प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने प्रदर्शन में शामिल होने के लिए 52 प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक शख्सियतों को निमंत्रण पत्र भेजे थे। कांग्रेस को छोड़कर जम्मू-कश्मीर के सभी प्रमुख क्षेत्रीय दलों ने इस प्रदर्शन से पूरी तरह किनारा कर लिया है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (पीसी) अपनी पार्टी सहित तमाम स्थानीय दलों ने न सिर्फ इस प्रदर्शन से दूरी बनाई है बल्कि नेकां के सामने ऐसी शर्तें रख दी हैं जिससे मुख्यमंत्री उमर अब इस मुद्दे पर बिल्कुल अकेले पड़ते नजर आ रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (पीसी) के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन ने भी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के प्रस्तावित जंतर-मंतर धरने पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस विधानसभा में राज्य के दर्जे का प्रस्ताव लाने में पूरी तरह विफल रही है। लोन ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर के लिए 5 अगस्त 2019 से पहले की स्थिति, अनुच्छेद 370, 35ए और पूर्ण राज्य का दर्जा सबसे सर्वोपरि हैं। इनमें अनुच्छेद 370 इन तीनों में सबसे महत्वपूर्ण है और उसे छोड़कर सिर्फ स्टेटहुड के पीछे भागना ठीक नहीं है।
इस चौतरफा राजनीतिक घेराबंदी के बीच भाजपा ने भी उमर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा ने 20 जुलाई को ही श्रीनगर में ''हमारा अधिकार, हमारा भविष्य'' के नारे के साथ सचिवालय घेराव का बड़ा ऐलान किया है। भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि उमर अब्दुल्ला सरकार जॉब स्कैम और आउटसोर्सिंग के नाम पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और यह विफल सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए दिल्ली में प्रदर्शन कर रही है। भाजपा का यह आंदोलन युवाओं की नौकरियों को सुरक्षित करने और स्थानीय संसाधनों पर हक जताने के लिए एक ऐतिहासिक कदम होगा।
अब इस पूरे परिदृश्य में केवल जम्मू-कश्मीर कांग्रेस इकाई ही उमर अब्दुल्ला का साथ देती दिख रही है क्योंकि वह वर्तमान में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है। हालांकि, कांग्रेस की मूल विचारधारा में कभी भी अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली शामिल नहीं रही है, उनकी मांग हमेशा सिर्फ स्टेटहुड तक सीमित रही है। ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अपने ही सूबे के क्षेत्रीय दलों द्वारा ठुकराए जाने के बाद उमर अब्दुल्ला दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर के बाहरी राजनीतिक दलों का कितना समर्थन जुटा पाते हैं।
सीएम उमर और डाॅ. फारूक दिल्ली रवाना हुए
फिलहाल, भले ही दिल्ली पुलिस की तरफ से नेशनल कॉन्फ्रेंस को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की औपचारिक अनुमति अभी तक नहीं मिली है लेकिन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और डॉ. फारूक अब्दुल्ला नई दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि अगर उन्हें जंतर-मंतर पर अनुमति नहीं मिलती है, तब भी वे किसी अन्य स्थान से अपनी आवाज बुलंद करने की कोशिश जरूर करेंगे। उधर, विरोधियों के रुख पर पलटवार करते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा कि सभी विधायक और पदाधिकारी प्रदर्शन में शामिल होंगे और जो दल बहाने बनाकर जनता के साथ खड़े होने से पीछे हट रहे हैं, उनकी अनुपस्थिति उनके असली रंग को उजागर करती है। वे अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए लोगों के अधिकारों से समझौता कर रहे हैं और इतिहास हमेशा याद रखेगा कि कौन जम्मू-कश्मीर के हक के लिए खड़ा था और किसने जन-विरोधी ताकतों का साथ दिया।
जम्मू-कश्मीर के विकास को नजरअंदाज किया जा रहा : बुखारी
अपनी पार्टी के अध्यक्ष सैयद मोहम्मद अल्ताफ बुखारी ने श्रीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस पर स्टेटहुड की आड़ में जम्मू-कश्मीर के विकास को नजरअंदाज करने का बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी क्षेत्र के राजनीतिक मुद्दों के समाधान के लिए टकराव नहीं, बल्कि सुलह के रास्ते पर विश्वास करती है क्योंकि टकराव ने 1947 से कश्मीर को सिर्फ बर्बाद ही किया है और इसी के चलते 1953 में वजीर-ए-आजम का पद भी खोना पड़ा था। बुखारी ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के षड्यंत्रों के चलते विकास के लिए मिलने वाले सरकारी फंड्स लैप्स हो रहे हैं और वे इस रचे हुए राजनीतिक ड्रामे के भागीदार नहीं बनेंगे। उन्होंने साफ किया कि वे राज्य के दर्जे की मांग के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अगर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सभी दलों को भरोसे में लेकर विचार-विमर्श किया होता तो यह पहल ज्यादा बेहतर होती।
आंदोलन केवल राज्य के दर्जे तक सीमित नहीं होना चाहिए : मीरवाइज
एनसी ने एक निमंत्रण पत्र मीरवाइज उमर फारूक को भी भेजा था जिस पर पार्टी ने स्पष्टीकरण दिया कि उन्हें एक धार्मिक गुरु की हैसियत से आमंत्रित किया गया है। हालांकि जामिया मस्जिद में गत जुमे के खुत्बे को संबोधित करते हुए मीरवाइज ने भी अपनी शर्तें सामने रख दीं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 के बदलावों के बाद जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा उपाय छीनकर लोगों को अधिकारहीन कर दिया गया है। ऐसे में यह आंदोलन केवल राज्य के दर्जे तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें विशेष दर्जा, अनुच्छेद 370 व 35ए की बहाली, और बिना मुकदमे के सालों से जेलों में बंद युवाओं व राजनीतिक कैदियों की रिहाई का मुद्दा भी शामिल होना चाहिए ताकि एक स्थायी शांति का रास्ता तैयार हो सके।