श्रीनगर। राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने कहा है कि वह अगर चुने जाते हैं तो उनकी प्राथमिकताओं में कश्मीर मुद्दे का स्थायी समाधान, प्रदेश में शांति, न्याय, लोकतंत्र और सामान्य स्थिति बहाल कराने के लिए सरकार से आग्रह करना होगा। समर्थन जुटाने के लिए शनिवार को यहां पहुंचे सिन्हा विपक्षी नेताओं के साथ बैठक के बाद मीडिया से बात कर रहे थे।
भाजपा के पूर्व नेता और केंद्रीय मंत्री रह चुके यशवंत सिन्हा ने संवाददाताओं कहा कि मैं अगर निर्वाचित हो जाता हूं, तो मैं बिना किसी डर या पक्षपात के संविधान के संरक्षक के रूप में अपना कर्तव्य निभाऊंगा। उन्होंने दावा किया कि देश में सद्भाव नष्ट हो गया है, लेकिन राष्ट्र इसके लिए वापस लड़ेगा क्योंकि सांप्रदायिकता के खिलाफ उसका अपना स्वभाव है। उन्होंने कहा कि यह बेहद खेदजनक है कि केंद्र सरकार द्वारा निरस्त किए जाने के लगभग तीन साल बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 और 35 ए को निरस्त करने से संबंधित मामले की सुनवाई शुरू नहीं की है। सांविधानिक मामलों की सुनवाई में दीर्घ विलंब शीर्ष अदालत की विश्वसनीयता को खत्म करती है। उन्होंने कहा, जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए और विधानसभा के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव जल्द से जल्द होना चाहिए।
उन्होंने कहा, मैं जम्मू-कश्मीर में जबरन और हेरफेर करने वाले जनसांख्यिकीय परिवर्तन का विरोध करता हूं। सिन्हा ने कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर कहा कि केंद्र सरकार कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी के साथ पुनर्वास के लिए स्थितियां बनाने के अपने वादे में विफल रही है। केंद्र को न केवल कश्मीरी पंडित बल्कि उन सभी लोगों के साथ किया वादा पूरा करना चाहिए, जिन्हें कश्मीर से बाहर निकलने के लिए मजबूर किया गया था।
सिन्हा ने कहा कि जून 2020 में एक सर्वदलीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल की दूरी और दिल्ली की दूरी को हटाने का वादा किया था। दो साल से अधिक समय बीत चुका है और वादा अधूरा है। राजग की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के बारे में उन्होंने कहा कि उनके लिए मन में व्यक्तिगत बहुत सम्मान है। यह पूछे जाने पर कि क्या महाराष्ट्र में सरकार बदलने से उनके जीतने की संभावना पर कोई असर पड़ा है, पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनकी लड़ाई संख्या के बारे में नहीं बल्कि सिद्धांतों के बारे में है।
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जम्मू-कश्मीर में 3 नेकां व दो सांसद भाजपा के
जम्मू - कश्मीर में अभी कोई विधानसभा नहीं है। यहां से पांच लोकसभा सदस्य हैं, जिसमें तीन नेशनल कांफ्रेंस और दो भाजपा से हैं। लिलहाल इस केंद्र शासित प्रदेश से राज्यसभा का कोई सांसद नहीं है।