फारूक ने लोकसभा में उठाया जेकेएएस
परीक्षार्थियों व हाउसबोट मालिकों का मुद्दा
-कहा-आयोग के अल्प समय में दिए नोटिस से उम्मीदवारों की परेशानी बढ़ी
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और श्रीनगर से सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार को लोकसभा में जेकेएएस उम्मीदवारों और हाल में नगीन झील
में हुए अग्निकांड के शिकार हाउसबोट मालिकों का मुद्दा उठाया।
डॉ. अब्दुल्ला ने कहा कि आयोग के नोटिस ने उम्मीदवारों की परेशानी को बढ़ा दिया है। सामान्य रूप से परीक्षा के लिए 30 दिन का समय मिलना चाहिए, जो अभी तक परंपरा रही है। इस बार 7 अप्रैल को होने वाली परीक्षा के लिए सिर्फ पांच दिन पहले बताया गया। इससे उम्मीदवारों की परेशानी बढ़ गई है, क्योंकि अधिकांश उम्मीदवार देश के विभिन्न हिस्सों में काम कर रहे हैं या पढ़ाई कर रहे हैं। उनके लिए इतने कम समय में वापस आना संभव नहीं है।
जेकेपीएससी उम्मीदवारों के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए उन्होंने सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि वर्ष 2021 की अधिसूचना में ओपन मेरिट उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु सीमा 37 वर्ष थी। इसे घटाकर 32 वर्ष कर दिया गया था। इसलिए छूट की जगह उम्र सीमा कम कर दी गई, जबकि अन्य राज्यों में अधिकतम आयु 42 वर्ष है। यह जम्मू-कश्मीर के युवाओं के साथ पूरी तरह से अन्याय है। सरकार को अपने फैसले की समीक्षा करनी चाहिए और ऊपरी आयु सीमा में वृद्धि करनी चाहिए। सरकार के फैसले के कारण कई उम्मीदवार इन प्रतिष्ठित परीक्षाओं में भाग नहीं ले पाएंगे।
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बोट मालिकों की मदद करे मंत्रालय
डॉ. अब्दुल्ला ने पर्यटन मंत्रालय को उन हाउसबोट मालिकों की मदद का आग्रह किया जिनके हाउसबोट हाल में ही आग में जल गए थे। उन्होंने संबंधित मंत्रालय से प्रभावित बोट मालिकों को सब्सिडी वाली लकड़ी और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराकर उनकी मदद करने को कहा।