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परिसीमन से जनसांख्यिकी-इतिहास बदलने व संस्कृति मिटाने की कोशिश: नेकां

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श्रीनगर। नेशनल कांफ्रेंस ने कहा है कि अनुच्छेद 370 रद्द करने से जुड़ी याचिकाओं पर अदालत का फैसला आने तक परिसीमन आयोग को अपनी कार्यवाही आगे नहीं बढ़ानी चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि परिसीमन की सिफारिशों के जरिए प्रदेश की जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) बदलने की कोशिश की जा रही है। आयोग ने मनमाने ढंग से स्थापित मानकों के जरिए जानबूझकर जम्मू-कश्मीर के इतिहास और संस्कृति को मिटाने की कोशिश की है। आयोग को हब्बा खातून, गांधी जैसों के नाम पर निर्वाचन क्षेत्रों को पुनर्स्थापित करना चाहिए। नेकां ने बुधवार को अपनी आपत्तियों का मसौदा मीडिया को जारी किया।
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लोकसभा के तीन सांसदों फारूक अब्दुल्ला, हसनैन मसूदी और मोहम्मद अकबर लोन ने सोमवार को अपनी लिखित आपत्तियों में कहा कि विधानसभा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के सीमांकन का प्रस्ताव देने वाले कार्य पत्र 2-6 में दिए गए प्रस्ताव को वापस लिया जाए। ये सांसद आयोग के सहायक सदस्य भी हैं। आयोग के प्रस्ताव पर नेकां की ओर से दी गई आपत्तियों में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले पैनल ने मनमाने ढंग से कुछ अज्ञात मानदंड तैयार किए हैं, जिसके आधार पर सात सीटों की वृद्धि की गई है। जबकि मुख्य मानदंड के रूप में जनसंख्या के मूल सिद्धांत से समझौता करते हुए सीटों का संयोजन किया गया है। परिसीमन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों का समान प्रतिनिधित्व हो, जबकि आंतरिक रिपोर्ट के इस मौलिक सिद्धांत का बिल्कुल भी पालन नहीं किया है। जनसंख्या का मामला पीछे धकेल दिया और विधानसभा हलकों में इलाकों को मनमाने ढंग से जोड़ा घटाया गया।
नेकां नेताओं ने कहा कि कश्मीर में 150000 से ज्यादा की आबादी वाली18 विधानसभा क्षेत्र हैं जबकि जम्मू क्षेत्र में इन विधानसभा क्षेत्रों (पाडर, श्री माता वैष्णव देवी, बनी मुगल मदान, बसोहली, रामगढ़ और किश्तवाड़) की संख्या सात है।
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पार्टी ने कहा कि मानदंड कहते हैं कि एक विधानसभा खंड में जनसंख्या का अनुपात एक समान होना चाहिए। प्रस्ताव के मसौदे के अनुसार डोरू क्षेत्र से विधानसभा में एक सदस्य होगा जबकि पाडर, बनी और श्री माता वैष्णो देवी निर्वाचन क्षेत्रों के तकरीबन इतनी ही आबादी के क्षेत्रों के लिए विधानसभा में तीन सदस्य होंगे।
पार्टी का कहना है कि मानदंड कहते हैं कि एक विधानसभा क्षेत्र की औसत आबादी 1,36,304 होनी चाहिए। प्रस्ताव के अनुसार डोरू विधानसभा में औसत आबादी मानदंड के हिसाब से 56077 अधिक है जबकि पाडर के मामले में औसत से 85025 कम है। कश्मीर प्रांत के चौबीस निर्वाचन क्षेत्रों की औसत जनसंख्या 136304 से अधिक है, जबकि जम्मू प्रांत में केवल आठ निर्वाचन क्षेत्रों की जनसंख्या आयोग द्वारा निर्धारित एक निर्वाचन क्षेत्र की औसत जनसंख्या से अधिक है।
डोरू की जनसंख्या लगभग तीन निर्वाचन क्षेत्रों पाडर, श्री माता वैष्णो देवी और जम्मू के बनी निर्वाचन क्षेत्रों की जनसंख्या के बराबर है। इसलिए डोरू के लोग निर्णय लेने में समान हितधारक और शासन में समान भागीदार नहीं हो सकते। ये प्रस्ताव कश्मीर और जम्मू के दूर-दराज क्षेत्रों में अशक्तता और मताधिकार से वंचित करने की कहानी कह रहे हैं।
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थन्ना मंडी से जोड़े लोगों को पूरा जिला पार करना पड़ेगा
नेकां नेताओं ने कहा कि अनंतनाग, बडगाम, कुपवाड़ा और श्रीनगर जिलों में जनसंख्या के आधार पर सात बढ़ी हुई सीटों में से प्रत्येक को एक अतिरिक्त विधानसभा क्षेत्र आवंटित किया जाना चाहिए, जबकि जम्मू संभाग में राजोरी, पुंछ और डोडा को एक-एक सीट मिलनी है।
उन्होंने राजोरी विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि सोहना पीसी, डूंगी पीसी और बगला पीसी जो राजोरी के दूसरे छोर पर स्थित हैं उन्हें थन्ना मंडी के साथ जोड़ दिया गया है। इन क्षेत्रों के निवासियों को थन्ना मंडी पहुंचने के लिए राजोरी को पार करना पड़ता है। लोगों को होने वाली कठिनाई को नजरअंदाज कर सभी मौलिक कानूनी मानकों का घोर उल्लंघन किया गया है।
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असमान परिस्थितियों वाले इलाके जोड़ दिए
नेकां ने कहा कि अनंतनाग निर्वाचन क्षेत्र की तुलना में संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के अवास्तविक, अतार्किक और तर्कहीन सीमांकन का इससे अधिक चौंकाने वाला उदाहरण क्या हो सकता है। नेताओं ने कहा, आयोग ने बिना भूगोल, इतिहास और पहुंच की स्थिति को देखे अनंतनाग, कुलगाम और जैनापोरा को पुंछ और राजोरी के साथ शामिल कर लिया है। आयोग ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि पुंछ-राजोरी क्षेत्र और अनंतनाग-कुलगाम-जैनपोरा पीर पंजाल रेंज से अलग हैं और यह क्षेत्र भारी बर्फबारी के कारण यहां छह माह आवागमन आसान नहीं होता। पार्टी ने कहा कि शोपियां को श्रीनगर निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा बनाया गया है और बडगाम और बीरवाह को बारामुला का हिस्सा बनाया गया है, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है और लोगों की भारी असुविधा का कारण है।
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ऐतिहासिक नामों को मिटा दिया
हब्बाकदल, अमीरकदल, जदीबल, शांगस, कोकरनाग, संग्रामा, गुलमर्ग, होम शाली बाग, इंदरवाल, गांधी नगर जैसे कुछ ऐतिहासिक नामों को पूरी तरह से मिटा दिया गया है। हब्बाकदल में प्रसिद्ध कवयित्री रानी हब्बा खातून का नाम जुड़ा है, जबकि अमीरा कदल हमें अमीर खान का नाम याद दिलाती हैं, जिन्होंने वास्तुकला और शहरी विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
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