श्रीनगर। कश्मीर घाटी के ऐतिहासिक शिव मंदिर की देखभाल मुसलमान कर रहे हैं। प्राचीन मंदिर परिसर में फलों के बगीचे हैं। फूल और सब्जियां भी उगाई जा रही हैं। हिंदू पूजा करने आते हैं और यहां उगने वाली सब्जियां, फल और फूल हिंदुओं के लिए भेजी जाती हैं। श्रीनगर शहर के इश्बर निशात में जबरवान की पहाड़ियों पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर (गोपी तीर्थ) कश्मीरियत की अनोखी मिसाल है, जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी निभाया जा रहा है।
34 वर्षीय मूकबधिर मुस्लिम युवक निसार अहमद अलाई ने पिता के गुजर जाने के बाद मंदिर की देखभाल का जिम्मा संभाला और अब पूरी लगन से मंदिर परिसर को साफ सुथरा रखने के अलावा उसकी साज सज्जा में लगे रहते हैं। इससे पहले उसके पिता ने इस मंदिर की छह साल से अधिक समय तक देखभाल की। निसार अहमद सात माह से प्राचीन शिव मंदिर की देखभाल कर रहे हैं।
मूकबधिर निसार अहमद के पिता ने छह साल से अधिक समय तक मंदिर की देखभाल, जिनके देहांत के बाद निसार ने एक साल तक मंदिर की सेवा की। बाद में उनके पड़ोसी अब्दुल गफ्फार तीन साल से अधिक समय तक इस मंदिर के सेवादार रहे और अब फिर निसार इस मंदिर की सात माह से देखभाल कर रहे हैं। निसार नौवीं कक्षा पास हैं। वह न केवल मंदिर की सफाई करते हैं, बल्कि इसकी सुरक्षा की भी जिम्मेदारी उठाए हैं।
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स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मंदिर कश्मीर घाटी में आपसी भाईचारे की निशानी है। लंबे समय तक सुनसान रहने के बाद वर्ष 2014 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार सामाजिक विकास संस्था द्वारा किया गया था और तब से स्थानीय मुसलमान इसकी देखभाल कर रहे हैं।