श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने वीरवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि नई औद्योगिक नीति को भूमि आवंटन के लिए एक बार आवेदन करने के बाद पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही अपनी एकल पीठ के फैसले के खिलाफ प्रदेश सरकार की याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति अली मोहम्मद माग्रे और न्यायमूर्ति विनोद चटर्जी कौल की खंडपीठ ने अधिकारियों के इस तर्क को खारिज कर दिया कि हंदवाड़ा में प्लाईवुड निर्माण के लिए भूमि आवंटन का आदेश नई औद्योगिक नीति के लागू होने के बाद जारी किया गया था।
मामला उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा में औद्योगिक क्षेत्र में प्लाइवुड निर्माण इकाई की स्थापना से जुड़ा हुआ है। फैक्ट्री के मालिकों ने कहा कि उन्होंने जमीन आवंटन के लिए पुरानी औद्योगिक नीति के समय आवेदन किया था। कुछ प्रक्रियात्मक कार्यों के कारण आवंटन में देरी हुई थी। इस बीच 15 मार्च 2016 को नई नीति लागू कर दी गई। इसके बाद 3 मई 2016 को उन्हें तीन कनाल जमीन 40 साल के लिए लीज पर आवंटित की गई। इसके लिए उन्होंने 31 मार्च, 2016 को प्रीमियम की राशि भी जमा कर दी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने नई औद्योगिक नीति के तहत उनसे बढ़ी हुई दरों पर प्रीमियम की मांग की। इस सबंध में उसकी याचिका को एकल पीठ ने निष्पादित करते हुए कहा कि नई औद्योगिक नीति को उनके मामले पर लागू नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा, एकल न्यायालय ने रिट याचिकाकर्ताओं के पक्ष में भूमि आवंटन के आदेश के अनुसार किसी कार्रवाई के लिए अधिकारियों पर रोक लगा दी। साथ ही याचिकाकर्ता को उद्योग चलाने की अनुमति देने के लिए कहा था। इसके खिलाफ सरकार ने डबल बेंच के समक्ष याचिका दाखिल की थी।
डबल बेंच ने वीरवार को सुनवाई के दौरान कहा कि अधिकारी नई औद्योगिक नीति के तहत याचिकाकर्ता से प्रीमियम की मांग नहीं कर सकते थे। एक बार एक औद्योगिक इकाई की स्थापना के लिए याचिकाकर्ताओं के आवेदन/मामले को प्रासंगिक समय पर लागू एक विशेष औद्योगिक नीति के जनादेश के अनुरूप निरूपित किया गया था। ऐसी स्थिति में मामला शासन की नीतियों के तहत निपटाया जाना था न कि अफसरों द्वारा बनाई गई नीति के द्वारा।