श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने कश्मीर प्रेस क्लब को आवंटित परिसर वापस ले लिया। प्रशासन ने कहा कि पत्रकारों के विभिन्न समूहों के बीच असहमति और अप्रिय घटनाओं के बीच यह फैसला किया गया है कि श्रीनगर के पोलो व्यू स्थित कश्मीर प्रेस क्लब को आवंटित परिसर का आवंटन रद्द करके परिसर की भूमि और इस पर निर्मित भवन को संपदा विभाग को वापस कर दिया जाए।
सरकार ने कहा कि केंद्रीय पंजीकरण सोसायटी अधिनियम के तहत खुद को पंजीकृत करने में अपनी विफ लता तथा 14 जुलाई को कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद कमेटी का वैधानिक अस्तित्व नहीं रह गया। बताते हैं कि 29 दिसंबर को कमेटी का दोबारा से पंजीकरण कर दिया गया, लेकिन इसे पुलिस सत्यापन के कारण स्थगित रखा गया। रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटी ने शनिवार को कहा था कि एसएसपी सीआईडी ने इसे स्थगित कर दिया है क्योंकि क्लब के पदाधिकारियों के चरित्र का सत्यापन किया जाना है। सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि एडीएम श्रीनगर की ओर से अंतिम रिपोर्ट प्राप्त होने तक 29 दिसंबर को पंजीकरण संबंधी जारी आदेश को स्थगित कर दिया गया है। कहा कि नए प्रबंध निकाय के गठन के लिए चुनाव कराने में अपनी विफ लता के कारण एक अन्य समूह ने अंतरिम प्रबंधन होने का दावा पेश किया। विवाद के इस पहलू के मद्देनजर और सोशल मीडिया और अन्य रिपोर्ट के मद्देनजर संभावित कानून और व्यवस्था की स्थिति व शांति भंग के खतरे और वास्तविक पत्रकारों की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप आवश्यक हो गया है। कहा कि सरकार यह भी उम्मीद करती है कि सभी पत्रकारों का एक विधिवत पंजीकृत वास्तविक समाज जल्द से जल्द गठित किया जाएगा और वही परिसर के दोबारा आवंटन के लिए सरकार से संपर्क करने में सक्षम होगा।
वहीं, कश्मीर प्रेस क्लब के अपदस्थ प्रबंधन ने दावा किया कि पत्रकारों के एक समूह को अंतरिम निकाय के रूप में स्थापित करने का असल मकसद क्लब को बंद करना था। इसके साथ ही उसने एक बार फि र जोर दिया कि घाटी में पत्रकार इन चुनौतियों का सामना करेंगे। अपदस्थ प्रबंधन के महासचिव इशफ ाक तांत्रे ने कहा कि ऐसा लगता है कि असल मकसद कश्मीर प्रेस क्लब को बंद करना था। इस मकसद के लिए उन्होंने पत्रकारों के एक समूह को स्थापित करने की कोशिश की। इस कार्रवाई से वे कश्मीर प्रेस क्लब नामक मंच के माध्यम से पत्रकारों की गूंजने वाली आवाज को दबाना चाहते थे जो घाटी में एकमात्र लोकतांत्रिक और स्वतंत्र पत्रकार निकाय है। मैं दोहराना चाहता हूं कि कश्मीर में पत्रकारिता आगे बढ़ी है और भविष्य में भी यह सभी संकटों से बचेगी।