नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूख अब्दुल्ला व पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने आयात शुल्क घटाने की अलोचना की है। फारूख अब्दुल्ला ने कहा कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव के बारे में नहीं सोचा।
केंद्र सरकार ने अमेरिका से आयात होने वाले सेब पर आयात शुल्क में 20 फीसदी की कटौती की है। इससे सेब उत्पादन में अग्रणी जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के बागवानों में नाराजगी देखी जा रही है। बागवानों का कहना है कि कहना है कि शुल्क में कटौती से देसी सेबों के दामों में भारी गिरावट आएगी।
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वहीं, नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूख अब्दुल्ला व पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी इस फैसले की अलोचना की है। फारूख अब्दुल्ला ने कहा कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव के बारे में नहीं सोचा। अमेरिका को खुश करने के लिए केंद्र सरकार स्थानीय उत्पादकों को नुकसान पहुंचा रही है।
उन्होंने कहा, 'मैं भारत सरकार से अपील करता हूं कि वह ऐसा कोई कदम न उठाए जिससे यहां पहले से मौजूद गरीबी और बढ़ जाए और हम एक और संकट में फंस जाएं। अगर उन्होंने लोगों के लिए इसे आसान नहीं बनाया तो हम सड़क पर उतरेंगे और विरोध करेंगे।'
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महबूबा मुफ्ती ने हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में प्रचुर मात्रा में अच्छी गुणवत्ता वाले सेब उत्पादित होते हैं। सरकार अब भी सेब का आयात क्यों करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार का 'मेक इन इंडिया' एक मजाक प्रतीत होता है। आयात शुल्क घटाए जाने से कश्मीर की बागवानी पर बुरा असर पड़ेगा।
वहीं, सीपीआई (एम) नेता एमवाई तारिगामी ने भी केंद्र की आलोचना की। उन्होंने कहा, ''अमेरिकी सेब पर लगने वाले आयात शुल्क में भारी कटौती कर दी गई है और इसे बाजार को सौंप दिया गया है। अब हमारे सेब उत्पादक कहां जाएंगे?''