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नॉर्थ टेक संगोष्ठी: लद्दाख के उपराज्यपाल बोले- हमारी एक वर्ग इंच जमीन पर भी चीन का कब्जा नहीं

Tue, 12 Sep 2023 05:55 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

लद्दाख के उपराज्यपाल ने कहा कि चीन ने एक भी वर्ग इंच भारतीय भूमि पर कब्जा नहीं किया है और सशस्त्र बल किसी भी दुस्साहस में शामिल होने वाले किसी भी व्यक्ति को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं।
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Ladakh LG Brig (Dr) BD Mishra - फोटो : पीआरओ
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विस्तार
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लद्दाख के उउप राज्यपाल ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) बीडी मिश्रा ने कहा कि चीन ने एक भी वर्ग इंच भारतीय भूमि पर कब्जा नहीं किया है और सशस्त्र बल किसी भी दुस्साहस में शामिल होने वाले किसी भी व्यक्ति को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं। सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर मिश्रा सेना की ओर से आयोजित तीन दिवसीय नॉर्थ टेक संगोष्ठी में भाग लेने के लिए सोमवार को यहां पहुंचे थे।

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मिश्रा ने कार्यक्रम से इतर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा, हमारे सशस्त्र बल किसी भी स्थिति के लिए तैयार हैं, और भगवान न करे अगर हमारे जवानों के साथ कोई दुस्साहस करता है तो उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सैनिकों का मनोबल बहुत ऊंचा है। 

उनका इरादा हर वर्ग इंच भूमि की रक्षा करना है। कोई भी यहां पैर जमाने के इरादे से भारत की ओर आने की हिम्मत नहीं कर सकता। मुझे लगता है कि इसका सारा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महान नेतृत्व को जाता है।
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चीन की ओर से लद्दाख में जमीन के एक बड़े हिस्से पर कब्जा करने संबंधी कांग्रेस नेता राहुल गांधी की हाल ही में की गई टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, मैं किसी के बयान पर टिप्पणी नहीं करूंगा। लेकिन मैं वही कहूंगा जो तथ्य है क्योंकि मैंने खुद जमीन पर देखा है कि एक भी वर्ग इंच भूमि ऐसी नहीं है जिस पर चीनियों ने कब्ज़ा किया है। 

उन्होंने कहा, 1962 में जो कुछ भी हुआ, वह सारहीन है। लेकिन आज हम अपनी जमीन के आखिरी इंच तक पर काबिज हैं। हाल ही कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लद्दाख दौरे के दौरान कहा था कि उन्हें यह जानकर दुख होता है कि चीन ने लद्दाख में हमारी जमीन पर कब्जा किया हुआ है।

एलएसी पर तैनात करने के लिए खरीदे हथियार

यह पूछे जाने पर कि क्या सुरक्षा बढ़ाने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तैनात करने के लिए हथियारों की पहचान कर ली गई है और उन्हें खरीद लिया गया है, उन्होंने कहा कि ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने का कि 1961 में जब मैं सेना में नियुक्त हुआ तो मेरी बटालियन में कुछ भी स्वदेशी नहीं था। हमारी राइफलें, 303 छोटे हथियार बर्मिंघम में थे। हमें जो घड़ी मिली वह स्विट्जरलैंड में बनी थी। आज ऐसी कोई भी चीज नहीं है जो स्वदेशी न हो।

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