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Earthquake: जम्मू-कश्मीर में भूकंप के झटके, रिक्टर पैमाने पर 3.4 रही तीव्रता

Mon, 23 May 2022 01:29 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले में सोमवार को भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इनकी तीव्रता 3.4 रही।अधिकारियों ने बताया कि किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई खबर नहीं है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में सोमवार को भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए हैं। रिक्टर पैमाने पर इनकी तीव्रता 3.4 रही। इससे किसी भी तरह के नुकसान की खबर नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप सुबह साढ़े दस बजे दर्ज किया गया।
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भूकंप उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले में 34.43 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 75.03 डिग्री पूर्वी देशांतर 50 किलोमीटर की गहराई पर आया। अधिकारियों ने बताया कि किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई खबर नहीं है।
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भूकंप क्यों आते हैं?
 
भूकंप के आने की मुख्य वजह धरती के अंदर प्लेटों का टकराना है। धरती के भीतर सात प्लेट्स होती हैं जो लगातार घूमती रहती हैं। जब ये प्लेटें किसी जगह पर आपस में टकराती हैं, तो वहां फॉल्ट लाइन जोन बन जाता है और सतह के कोने मुड़ जाते हैं। सतह के कोने मुड़ने की वजह से वहां दबाव बनता है और प्लेट्स टूटने लगती हैं। इन प्लेट्स के टूटने से अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है, जिसकी वजह से धरती हिलती है और हम इसे भूकंप मानते हैं।


भूकंप की तीव्रता का क्या अर्थ है?

रिक्टर स्केल पर 2.0 से कम तीव्रता वाले भूकंप को माइक्रो कैटेगरी में रखा जाता है और यह भूकंप महसूस नहीं किए जाते। रिक्टर स्केल पर माइक्रो कैटेगरी के 8,000 भूकंप दुनियाभर में रोजाना दर्ज किए जाते हैं। इसी तरह 2.0 से 2.9 तीव्रता वाले भूकंप को माइनर कैटेगरी में रखा जाता है। ऐसे 1,000 भूकंप प्रतिदिन आते हैं इसे भी सामान्य तौर पर हम महसूस नहीं करते। वेरी लाइट कैटेगरी के भूकंप 3.0 से 3.9 तीव्रता वाले होते हैं, जो एक साल में 49,000 बार दर्ज किए जाते हैं। इन्हें महसूस तो किया जाता है लेकिन शायद ही इनसे कोई नुकसान पहुंचता है।

लाइट कैटेगरी के भूकंप 4.0 से 4.9 तीव्रता वाले होते हैं जो पूरी दुनिया में एक साल में करीब 6,200 बार रिक्टर स्केल पर दर्ज किए जाते हैं। इन झटकों को महसूस किया जाता है और इनसे घर के सामान हिलते नजर आते हैं। हालांकि इनसे न के बराबर ही नुकसान होता है।
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