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Bitta Karate Case: कश्मीरी पंडित सतीश टिक्कू का हत्यारोपी बिट्टा कराटे मामले की सुनवाई स्थगित, दो हफ्तों के बाद होगी पेशी

Mon, 23 May 2022 01:01 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

कश्मीर पंडित सतीश टिक्कू का हत्यारोपी फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे मामले की सुनवाई सोमवार को स्थगित हो गई है। इस मामले में अगली सुनवाई अब दो हफ्तों के बाद की जानी है।
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फाइल फोटो: बिट्टा कराटे - फोटो : india today
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विस्तार
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कश्मीर पंडित सतीश टिक्कू एवं अन्य लोगों का हत्यारोपी फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे मामले की सुनवाई सोमवार को स्थगित हो गई है। कोर्ट में इस मामले में अगली सुनवाई अब दो हफ्तों के बाद होगी। बिट्टा कराटे कश्मीरी पंडित सतीश टिक्कू की हत्या का मुख्य आरोपी है। सतीश टिक्कू की हत्या के 31 साल बाद उनके परिजनों ने श्रीनगर में स्थानीय अदालत में आवेदन देकर दर्ज प्राथमिकी पर सुनवाई की मांग की है।

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1990 Massacre of Kashmiri Pandits - फोटो : सोशल मीडिया
वर्ष 1990 में सतीश टिक्कू की हुई थी हत्या

वर्ष 1990 में सतीश टिक्कू की हत्या कर दी गई थी। उसका आरोप बिट्टा कराटे पर लगा था। 1991 में एक टीवी चैनल पर साक्षात्कार के दौरान बिट्टा कराटे ने स्वीकार किया था कि उसने सतीश टिक्कू समेत दर्जनों कश्मीरी पंडितों को मार डाला, जिसके बाद कश्मीरी पंडितों ने घाटी से पलायन किया। हालांकि बाद में अपनी स्वीकारोक्ति से पलटते हुए बिट्टा ने कहा था कि उसने किसी को नहीं मारा और उसने टीवी चैनल पर दबाव में उक्त बयान दिया था।

1990 Massacre of Kashmiri Pandits - फोटो : सोशल मीडिया

जेल में बंद है बिट्टा

बिट्टा को वर्ष 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आतंकी फंडिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया था। वह तबसे जेल में है। इससे पहले नवंबर 1990 और 2006 के बीच हत्या व अन्य विभिन्न आरोपों में लगभग 16 वर्षों तक जेल में रहा था। 2006 में टाडा अदालत ने उसके खिलाफ आरोप तय करने में अत्यधिक देरी के आधार पर जमानत दी थी।

द कश्मीर फाइल्स - फोटो : सोशल मीडिया

'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म में दिखाई गई है आतंकी बिट्टा की हैवानियत  

'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म में आतंकी बिट्टा की हैवानियत और लोगों को भड़काने वाला इंटरव्यू दिखाया गया है। उसने इंटरव्यू में बेखौफ होकर कश्मीरी हिंदुओं की हत्या की बात कबूली है। वह बताता है कि उसने करीब 20 लोगों को मौत के घाट उतारा। इसमें कश्मीर पंडित और मुसलमान भी शामिल हैं। वह बताता है कि उसने सबसे पहले सतीश कुमार टिक्कू को मारा, जोकि कश्मीरी पंडित परिवार से ताल्लुक रखता था।  

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यासीन मलिक
बिट्टा जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट से जुड़ा था। वर्ष 2006 में अपनी रिहाई के बाद उसने अलगाववादी नेता यासीन मलिक के नेतृत्व वाले जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट से नाता तोड़ लिया था और अब वह जेकेएलएफ के दूसरे गुट का हिस्सा है।
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