नौशेरा। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की तरफ से मेथ्यानी में चल रही श्री हरि कथा में सोमवार को शिष्या साध्वी सरोज भारती ने भक्त ध्रुव की गाथा सुनाते हुए कहा कि चाहे ध्रुव की आयु छोटी थी, लेकिन ईश्वर तत्व को प्राप्त कर लिया।
सौतेली मां सुरुचि ने उसे पिता की गोद में बैठने नहीं दिया। मां सुनीति के समझाने पर कि संसारी पिता की गोद से प्रभु की गोद श्रेष्ठ है। अगर गोद में बैठना है तो ईश्वर की गोद में जाकर बैठ। ईश्वर की गोद से तुझे कोई नहीं उठा सकता। ईश्वर को प्राप्त करने के लिए ध्रुव वन में चल पड़ा। रास्ते में देव ऋ षि नारद मिलते हैं, और उसके अंत:करण में ईश्वर तत्व का ज्ञान कराते हैं। नारद के दिखाए मार्ग पर चल कर ध्रुव भगवान की भक्ति करता है और एक दिन स्वयं भगवान विष्णु उसे अपनी गोद में बिठाकर आशीष प्रदान करते हैं।
कथा में डीडीसी सदस्य राजेंद्र शर्मा, सरपंच भूषण उप्पल, बालकराम, विजय कुमार उपस्थित रहे।