राजोरी। जिले के कोटरंका स्थित पुलिस थाने के पास हुए दोहरे विस्फोट को एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी पुलिस मामले को सुलझाने में नाकाम साबित हो रही है। हालांकि मामले की जांच में जुटी प्रदेश जांच एजेंसी यानि एसआईए, सेना की रोमियो फोर्स और पुलिस ने अपनी जांच के दौरान बहुत जानकारियां हासिल की हैं, लेकिन अभी तक कोई बड़ी सफलता जांच एजेंसियों के हाथ नहीं लगी है। हुए विस्फोट में एक नागरिक की मौत हुई थी और 16 अन्य घायल हुए थे।
जांचकर्ताओं ने पुष्टि किया कि कोटरांका विस्फोट में इस्तेमाल किए गए दोनों विस्फोटक उपकरण नौ मार्च को उधमपुर शहर के सलाथिया चौक पर एक रेहरी में सब्जी के डिब्बे में आतंकवादियों द्वारा किए गए आईईडी विस्फोट से मिलते जुलते थे। जिसमें एक नागरिक की मौत हो गई थी और 16 अन्य घायल हुए थे। सूत्रों ने कहा कि जो तीनों विस्फोटक उपकरण, जिसमें दो कोटरंका में और एक उधमपुर में इस्तेमाल किए गए थे, उनमें कोई स्प्लिन्टर्स नहीं थे। लेकिन उनके धमकों से होने वाली आवाज बहराकर देने वाली थी। सूत्रों ने कहा कि तीनों उपकरणों की प्रकृति का पता लगाया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि उपकरणों को स्थानीय रूप से फैब्रिकेट किया गया था।
जांच एजेंसियों का मानना है कि कोटरांका और उधमपुर में हुए आतंकी हमलों के लिए एक विशेष आतंकवादी संगठन जिम्मेदार है और दोनों धमकों की सुई रेसिस्टेंस फ्रंट नामक आतंकवादी संगठन की ओर घूम रही है। लेकिन पुलिस या अन्य सुरक्षा एजेंसियों के हाथ अभी तक कोई सफलता नहीं लगी है। याद रहे कि 26 मार्च को कोटरंका में पहला धमाका रात 8.15 बजे और दूसरा रात 8.35 बजे हुआ था। पुलिस दल और पहले विस्फोट के बाद मौके पर जमा भीड़ को निशाना बनाने के लिए दूसरे उपकरण में 20 मिनट का अंतर तय किया गया था। हालांकि, आतंकवादियों की साजिश विफल हो गई, क्योंकि मौके पर पहुंचे कंडी पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मी दूर से जांच कर रहे थे और दूसरे विस्फोट में बाल-बाल बचे थे। तब तक अधिकांश दुकानें बंद होने के कारण मौके पर भीड़ नहीं थी।