पुंछ में पी ओ के से इस पार आए बच्चों से मिलते ब्रिगेड कमांडर और बच्चों को राहें मिलन से घर भेजते
- फोटो : POONCH
पुंछ। दूसरे मुल्कों को भी हिंदुस्तानी फौज से सबक लेना चाहिए। यह कहना है तीन दिन पहले जिले में नियंत्रण रेखा से पकड़े गए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के तीन नाबालिग बच्चों का, जिन्हें वीरवार को सेना ने उनके घर लौटा दिया।अपने वतन अपने घर लौटने के पहले नियंत्रण रेखा के गांव गुलपुर में स्थित गोरखा रेजिमेंट मुख्यालय में 17 वर्षीय धनयाल मलिक, 13 वर्षीय अरबाज रहीम और 9 वर्षीय उमर रहीम का कहना था कि हम रंगड़ नाले में मछलियां पकड़ते-पकड़ते गलती से हिंदुस्तान पहुंच गए।
जहां हमें हिंदुस्तानी फौज ने पकड़ लिया, तो हम बहुत डर गए थे कि अब हमारा क्या होेगा। हम यह सोच कर परेशान हो रहे थे, लेकिन हिंदुस्तानी फौज ने पहले हमें अपनी चौकी पर लाई और जब हमने बताया कि हम मकबूजा कश्मीर के रहने वाले हैं तो भी हमारे साथ फौज ने किसी तरह की ज्यादती नहीं की। हमें यहां लाया गया और बढ़िया खाना खिलाया गया। उसके बाद हमें मस्जिद में ले जाया गया और हमें गांव के स्कूली बच्चों से मिलवाया गया। फौज ने हमारा बहुत ख्याल रखा।
बिना पाकिस्तानी सेना का नाम लिए पीओके के बच्चों का कहना था कि दूसरे मुल्कों की फौज को भी हिंदुस्तानी फौज से सबक लेना चाहिए कि बच्चों के साथ कैसा सलूक किया जाता है। इंसानियत क्या होती है। यहां तो फौज ने हमें इस बात का अहसास भी नहीं होने दिया कि हम किसी दूसरे मुल्क की फौज के पास हैं।
गौरतलब है कि सेना की तरफ से अकसर नियंत्रण रेखा के इस पार आ जाने वाले बेगुनाह पीओके नागरिकों के साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया जाता है। जबकि दूसरी तरफ नियंत्रण रेखा के उस पार तैनात पाकिस्तानी सेना की तरफ से भारत की तरफ से गलती से उस पार चले गए लोगों के साथ ही नहीं बल्कि पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र के नागरिकों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया जाता है। ऐसे में इन तीन पाकिस्तानी बच्चों ने भी बिना नाम लिए पाकिस्तानी सेना को आइना दिखाने का काम किया है।