कथा का श्रवण करती श्रद्धालु महिलाएं। संवाद
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कठुआ। शहर के वार्ड नंबर 2 स्थित पंडोरी धाम आश्रम में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन जारी है। शनिवार को कथा के चौथे दिन कथा व्यास हेमराज शास्त्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रभु से प्रीत करने का ज्ञान दिया। उन्होंने कहा कि जब हम निश्चल भाव से प्रभु से अपनी प्रीत लगाते हैं, तो हमें उन्हीं का सानिध्य प्राप्त होता है। जो हमारे जीवन को सार्थक बना सकता है।
कथा व्यास ने भगवान कृष्ण के गोकुल छोड़कर मथुरा जाने का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब भगवान ने गोकुल से प्रस्थान किया तो गोपियों ने उनका मार्ग रोक लिया, लेकिन जैसे ही उन्हें भगवान के स्वयं मथुरा जाने के निर्णय के बारे में पता चला। उन्होंने भगवान के मार्ग को छोड़ दिया। जोकि भगवान के प्रति उनके सच्चे प्रेम का सबूत है। क्योंकि प्रियतम के सुख को ही अपना सुख मानना सच्चा प्रेम है। मथुरा में भगवान श्री कृष्ण ने कंस का वध किया और धर्म की रक्षा की। जिससे सारी प्रजा कंस के आतंक से मुक्त हो गई। भगवान ने इसके बाद अपने नाना उग्रसेन और माता देवकी व पिता वासुदेव को बंधन मुक्त किया, साथ ही वह यदुवंश की सेवा करने के लिए मथुरा में ही वास करने लगे। जिससे पूरी प्रजा का कल्याण संभव हो सका।
उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा पुराण भक्ति ज्ञान वैराग्य और त्याग का नमूना है। जो हमारे इस लोक के जीवन के साथ साथ परलोक को भी मंगल बनाने वाला है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने मात्र से जीव धन्य हो जाता है, लेकिन हमें परमात्मा की प्राप्ति के लिए काम, क्रोध, मोह और लोभ को त्याग कर निश्चल भाव से गोविंद के चरणों से प्रेम करना होगा जैसा गोपियों ने किया।