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सड़क से वंचित है दो हजार की आबादी

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मूलभूत सुविधाओं की कमी के चलते प्रदर्शन करते बांजल के पंचायत प्रतिनिधि। संवाद - फोटो : KATHUA
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कठुआ। एक ओर देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है तो दूसरी ओर बनी सब डिवीजन की बांजल पंचायत के लोग अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। मूलभूत सुविधाओं से वंचित दो हजार के लगभग आबादी वाली इस पंचायत के प्रतिनिधि भी अब सरकार से गुहार लगाते-लगाते परेशान हो गए हैं। शुक्रवार को उन्होंने जहां प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। वहीं, 15 दिन का अल्टीमेटम भी जारी कर दिया है। दो टूक कहा कि यदि उनकी 15 दिन के भीतर सुनवाई नहीं होती है, तो पंचायत के प्रतिनिधि सामूहिक इस्तीफा दे देंगे। स्थानीय सरपंच अनिता देवी के नेतृत्व में एकत्रित हुए पंचों ने दो टूक कहा कि क्षेत्र की जनता ने जिस उम्मीद के साथ उन्हें पंचायत प्रतिनिधि बनाया था और जिस तरह से सरकार ने क्षेत्र की अनदेखी को जारी रखा है, ऐसें में उनके पास पद छोड़ने का ही विकल्प बचा है।
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सरपंच ने कहा कि किसी भी क्षेत्र की तरक्की का रास्ता वहां की सड़क से शुरू होता है। लेकिन हालात यह हैं कि देश की आजादी के 75वें वर्ष में भी यह इलाका सड़क से वंचित है। बताया कि तीन वर्ष पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह के बनी दौरे के दौरान भी सड़क से संबंधित ज्ञापन दिया गया लेकिन आज तक डीपीआर तैयार नहीं हुआ है। चला तक सड़क बनाई गई लेकिन इसे बांजल से जोड़ने के नाम पर अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है। बताया कि कोट गांव से कछीड़ के लिए लोक निर्माण विभाग ने आठ साल पहले सड़क का निर्माण शुरू करवाया। लेकिन सात सौ मीटर तक सड़क की कटाई कर काम को वहीं छोड़ दिया गया। जवाब मिलता है कि फंड ही उपलब्ध नहीं है। ऐसा ही था तो आखिर काम शुरू कर लाखों रुपये क्यूं बर्बाद किए गए। इसकी उच्च स्तरीय जांच करवाई जानी चाहिए। पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि क्षेत्र में बिजली की समस्या है। कई घर आज भी बिजली सेवा से वंचित है। पंडित दीन दयाल उपाध्याय और सौभाग्य योजना के तहत लगाए गए खंभों का मेहनताना भी लोगों को दो साल से नहीं दिया गया है।
पालकियों में पहुंचाए जाते हैं मरीज
बांजल पंचायत के नायब सरपंच सुरेष्ट पाल, पंच देव राज, बाल कृष्ण, संजय कुमार, पुष्पा देवी, पिंजो देवी ने बताया कि इलाके में दो मिडिल स्कूल और एक हाई स्कूल है। दूर दराज और पैदल इलाका होने के चलते यहां नियुक्त होने वाले शिक्षक भी रुची नहीं दिखाते हैं। ऐसा ही हाल स्वास्थ्य विभाग में भी है। डॉक्टर इन इलाकों में सेवाएं देना पसंद नहीं करते। लोगों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य के मायने, अपने हाल पर जीना है। बताया कि पालकियों में मरीजों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र के बाद फिर सड़क तक पहुंचाया जाता है। समय पर उपचार मिलने के अभाव में कई लोग दम तोड़ देते हैं।
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