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कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा किसानों के आंदोलन की जीत है

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हीरानगर। नए कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणा पर किसानों, राजनीतिक व गैर राजनीतिक दलों के नेताओं ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी। कुछ ने कहा कि यह किसानों के आंदोलन की जीत है। कुछ ने कहा विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं रहा और अब वह किसानों को और गुमराह नहीं कर पाएंगे। कुछ ने यह भी कहा कि यह एक विशाल आंदोलन की जीत है। इससे यह साबित हुआ है कि एकजुट होकर आंदोलन किया जाए तो अपने अधिकारों को हासिल किया जा सकता है।
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किसान नेता शिवदेव सिंह ने कहा देशभर के किसानों ने एकजुट होकर नए कृषि कानूनों के खिलाफ संघर्ष किया। उनकी एकजुटता के आगे आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा। यह किसानों की बहुत बड़ी जीत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह फैसला आंदोलन शुरू होते ही लिया होता तो आज सैकड़ों किसान आंदोलन में शहीद न होते। सरकार के अहंकार के चलते किसानों को कड़कड़ाती ठंड, चिलचिलाती धूप और खुले आसमान में बरसात के पानी में सोना पड़ा। तब जाकर यह घोषणा प्रधानमंत्री की ओर से हुई है।
सरपंच विनय शर्मा ने कहा कि किसान आंदोलन की जीत हुई है। इससे देश में यह संदेश भी गया है कि सरकार चाहे जितनी भी अहंकारी हो देश के लोग मिलकर अपने हक के लिए संघर्ष करें तो उसका अहंकार को तोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने किसानों से माफी भी मांगी जो उन लोगों के मुंह पर तमाचा है जो इन किसानों को नकली किसान और खालिस्तानी कह रहे थे। सरपंच राहुल हंस ने कहा प्रधानमंत्री ने किसानों के लिए बड़ी घोषणा की है। जिससे सब किसान बेहद खुश हैं और मिठाइयां बांट रहे हैं। लेकिन विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं रहा है। किसानों को गुमराह करने की राजनीति पर विराम लग गया है। आने वाले समय में किसानों के नाम पर राजनीति करने वाले देश के सामने बेनकाब भी होंगे।
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