सावनचक स्थित मंदिर में भजनों पर झूमते श्रद्धालु। संवाद
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कठुआ। महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य पर मंदिरों में होने वाले कार्यक्रमों का क्रम शुरू हो गया है। वीरवार को शहर के सावनचक स्थित संकटमोचन शिवमंदिर में ‘पांच शाम शिव भोले के नाम’ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस मौके पर बटोत से आई साध्वी भुवनेश्वरी देवी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को शिव का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव कल्याणकारी, शुभकारी और हमारे पापों का नाश करने वाले हैं। उनका स्मरण हमारे सभी दुख हर सकता है।
कथा के शुभारंभ पर मंदिर के प्रबंधकों ने कथा वाचक साध्वी की अगुवाई में भव्य शोभायात्रा निकाली। हटलीमोड़ से मंदिर परिसर तक बैंडबाजे के साथ निकाली गई शोभायात्रा में शामिल भक्तों ने भोले भंडारी का जयघोष करते हुए अपनी आस्था जताई। वहीं मंदिर में विधिविधान से पूजन के उपरांत शुरू हुई शिव कथा के प्रथम सत्र में साध्वी भुवनेश्वरी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मार्ग दर्शन करते हुए कहा कि शिव वह चेतना है जहां से सब कुछ आरंभ होता है, जहां सबका पोषण होता है और जिसमें सब कुछ विलीन हो जाता है। अर्थात शिव ही वह शक्ति है जो सृजन के साथ संघार कर सकती है। सृष्टि में जहां भी जीवन है, वह शिव के बाहर नहीं हैं। यह पूरी सृष्टि ही शिव में विद्यमान है। आपका मन, शरीर सब कुछ केवल शिव तत्व से ही बना हुआ है, इसीलिए शिव को ‘विश्वरूप’ कहते हैं जिसका अर्थ है कि सारी सृष्टि उन्हीं का रूप है। उन्होंने कहा एक बार सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा और पालनहार विष्णु इस प्रश्न का उत्तर ढूंढ रहे थे कि शिव कौन हैं। ब्रह्मा ने विष्णु से कहा मैं शिव का मस्तक ढूंढता हूं, तुम उनके चरण खोजो। हजारों वर्षों तक विष्णु शिव के चरणों कि खोज में नीचे काफी गहराई में पहुंच गए और ब्रह्मा शिव का मस्तक खोजते-खोजते काफी ऊपर तक पहुंच गए, लेकिन उन्हें शिव के आदि और अंत का ज्ञान नही हो सका। अंत में वे दोनों मध्य में मिले और इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि वे शिव को नहीं खोज सकते यहीं से शिवलिंग अस्तित्व में आया। शिवलिंग अनंत शिव की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है।