बसोहली के सननघाट में आयोजित रामलीला मंचन में भाग लेते कलाकार। संवाद
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बसोहली। सननघाट में आयोजित रामलीला के छठे दिन राम बनवास का मंचन किया गया। रामलीला के मंचन के दौरान सर्वप्रथम कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वचन मांगे। पहले वचन से राम के लिए 14 वर्षों का वनवास और दूसरे वचन से भरत को राज सिंहासन मांगा। राजा दशरथ के बहुत समझाने के बाद भी कैकेयी अपने वचनों पर अडिग रहती हैं। इसके बाद राम, सीता और लक्ष्मण सन्यासी की वेशभूषा धारण कर राजा दशरथ एवं तीनों रानियों से आज्ञा लेकर वन की ओर प्रस्थान करते हैं।
राम को वन जाता देख रामलीला मैदान का पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठता है। पुत्र वियोग में दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं। भरत को जब यह जानकारी मिलती है कि राम को 14 वर्ष का वनवास हुआ है तो वह अपनी मां कैकेयी से बहुत नाराज होते हैं। राम को वन से वापस लाने के लिए भरत वन चल देते हैं। वन में भरत की भेंट राम से होती है। भरत ने राम से वापस राजमहल चलने का आग्रह करते हैं लेकिन राम उन्हें पिता के वचन का पालन करने की बात कहते हैं और जाने से मना कर देते हैं। रामलीला के इन दृश्यों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे रहे।