कठुआ। समुद्र तल से सात हजार फीट की ऊंचाई पर घास के गलीचों से लकदक विशालकाय मैदान। आसपास देवदार के जंगल और कुदरती नजारों के बीच पल-पल बदलता मौसम। 23 वर्ग किलोमीटर तक फैले सरथल में एक से बढ़कर एक विहंगम स्थल देखने वाले को अपना मुरीद बनाते हैं। मैदानों में लू के थपेड़ों और तपती गर्मी के बीच इन दिनों सरथल में पर्यटकों की रौनक लगने लगी है। खास तौर पर रविवार को बनी सब डिवीजन की इस खूबसूरत वादी में पर्यटकों ने खूब मस्ती की।
प्राकृतिक खूबसूरती से लबरेज सरथल आज भी सरकारी नजरें इनायत होने की बाट जोह रहा है। डेढ़ दशक पूर्व प्रदेश स्तरीय मेले के आयोजन से सरथल विकास का नारा दिया गया, लेकिन पर्यटन विकास के लिहाज से सरथल आज भी पिछड़ने पर मजबूर है। हालात यह हैं कि यहां के नुमाइंदे इस इलाके को आज तक दूर संचार से भी नहीं जोड़ पाए हैं। बनी भद्रवाह सड़क विस्तारीकरण का कार्य जारी है और पूरा होने के बाद ही सरथल तक अच्छी सड़क मय्यसर हो पाएगी।
बनी तहसील मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर सरथल इलाका उत्तर में भद्रवाह और पूर्व में हिमाचल से सटा है। प्राकृतिक नजारों से भरे पूरे सरथल में पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं हैं। इसी को देखते हुए पर्यटन विकास मंत्रालय ने सरथल विकास के कई वादे किए, लेकिन जमीनी हकीकत में खास अमल नहीं हो पाया है। सरथल में आठ सौ कनाल का एक व छह सौ कनाल के दो विशालकाय टापूनुमा मैदान हैं। यहां बादल मैदान में कुछ पल के लिए आते हैं और फिर हट जाते हैं। हरे-भरे मैदान, पहाड़ियां, नीला आकाश और बर्फ ओढ़े पहाड़ियों में यहां गजब का आकर्षण है।
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मैदानों में पारा 43 के पार सरथल में शाम ढ़लते ही पहनने पड़ते हैं गर्म कपड़े
चिलचिलाती गर्मियों के मौसम में सरथल में सर्द बयार शाम ढ़लते ही सर्दी के मौसम का एहसास करवाती है। आज भी शाम ढलने के साथ ही यहां का मौसम लोगों को गर्म कपड़े ओढ़ने को मजबूर करता है। इतना ही नहीं सरथल घूमने आने वाले लोग यहां बॉन फायर से लेकर स्थानीय व्यंजनों का भी लुत्फ उठाते हैं।
ट्रेकिंग के दीवानों के लिए सरथल के दर्रो में बर्फ का अनुभव कोई नई बात नहीं है। छत्रगलांट टॉप और गुल्ली डंडा तक घूम रहे पर्यटक यहां के ग्लेशियरों का मजा ले रहे हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर व मनमोहक होने के साथ-साथ ही यह बेहद ठंडा स्थल है। जम्मू से 288 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सरथल समुद्र तल से 7200 फुट की ऊंचाई पर है। यहां पहुंचने पर हर कोई एक पल के लिए सबकुछ भुला कर प्रकृति की अनोखी छटा को निहारने लगता है।
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सर-थल यानि धरती का स्वर्ग
बनी के लोग सरथल का मतलब जमीन पर स्वर्ग बताते हैं। लोगों का कहना है कि सरथल दो अक्षरों का मेल है सर जिसका मतलब है सबसे ऊपर यानी स्वर्ग और थल का मतलब है जमीन। यहां मई से सितंबर तक का मौसम एडवेंचर के शौकीन लोगों के लिए माकूल है। चारों ओर हरियाली, रंगबिरंगे पंछी, जंगली जानवरों की आवक और मात्र कुछ किलोमीटर पर बर्फ से लदे पहाड़ और प्रदूषण मुक्त स्वच्छ हवा। कुदरत की हसीन वादी में बिना बिजली के रहना एक अनोखा अनुभव हो सकता है। पैदल चलकर पहाड़ों पर बर्फ के साथ जून और जुलाई में खेलना एक अद्भुत अवसर है। रहने के लिए अगर अपने साथ टेंट लेकर आया जाए तो मजे ही कुछ और हैं। दूध, पनीर, खोया, दही, कलाड़ी और ट्राउट मछली आदि सब कुछ अन्य जगहों से सस्ता मिलता है। यहां का मुख्य व्यंजन जलेबी को दूध में डाल कर खाना है, जिसका आनंद लेने के लिए हर साल लोग आते रहते हैं।