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डीडीसी सदस्य ने अधिकारियों से मांगे दो टूक जवाब, अध्यक्ष ने कहा- दरबार के बीच नहीं चलाएं दरबार

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कठुआ। पंचायती राज के थ्री टियर सिस्टम में जनता की समस्याओं को सुनने के लिए जिला विकास परिषद के जनता दरबार लगाए जा रहे हैं। लेकिन इन दरबारों में जनता की समस्या को सुनते ही अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी भड़कते दिखाई दे रहे हैं। नगरी में आयोजित जनता दरबार में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।
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जिला विकास परिषद के सदस्य की ओर से जनता के सवालों पर अधिकारियों से दो टूक जवाब मांगे जा रहे थे, इसी बीच जिला विकास परिषद के अध्यक्ष भड़क गए। उन्होंने यह तक कह दिया कि अगर सब कुछ जिला विकास परिषद सदस्य को ही पूछना है, तो वे क्यों बैठे हैं। यही नहीं, जिला विकास परिषद के अध्यक्ष आपा खोते हुए मीडिया पर भी भड़क गए।
शुक्रवार को तहसील नगर में जिला विकास परिषद का तीसरा जनता दरबार लगाया गया था। यहां जनता की समस्याओं को सुनने के लिए जिला विकास परिषद के अध्यक्ष महान सिंह, जिला विकास परिषद के सदस्य संदीप मजोत्रा और नगर कमेटी नगरी परोल के अध्यक्ष अनिल सिंह अंदोत्रा पहुंचे। कार्यक्रम में जनता की मौजूदगी कम रही। लेकिन मौके पर पहुंचे विभिन्न विभागों के अधिकारियों से जिला विकास परिषद सदस्य संदीप मजोत्रा समस्याओं के बारे में जानकारी ले रहे थे। इसके साथ ही समयबद्ध लोगों की समस्याओं को हल करने को भी कहा जा रहा था। इसी बीच जिला विकास परिषद के अध्यक्ष भड़क गए। टोकते हुए कहा कि सदस्य अपनी बात रखें। दरबार के बीच दरबार न चलाएं। कहा कि यदि सदस्य ही अधिकारियों से सवाल पूछना शुरू कर देंगे, तो अध्यक्ष क्या करेंगे।
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लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने की कोशिश
मामले पर जिला विकास परिषद के सदस्य संदीप मजोत्रा ने कहा कि दरबार में काफी कम लोग आए थे। ऐसे में जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप वो जनप्रतिनिधि के रूप में अधिकारियों से सवाल पूछ रहे थे और समस्याएं रख रहे थे। उन्हें जिला विकास परिषद अध्यक्ष की ओर से रोकने की कोशिश की गई, जो लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने की एक कोशिश है। कहा कि उनका फर्ज लोगों के लिए आवाज उठाना है वो उठाते रहेंगे।
पंचायत में तीन साल से नहीं हो रहा कोई बड़ा काम
कार्यक्रम में पहुंचे पंच प्रवीण ने भी कहा कि यह घटना सही नहीं थी। कार्यक्रम में पहुंचे अन्य पंचों ने कहा कि ब्लाक दिवस, बैक टू विलेज में रखी गई समस्याओं का कोई समाधान नहीं हुआ है। पंचायती राज में उनके पास पंचायत घर तक उपलब्ध नहीं है। पंचायत में तीन साल से कोई बड़ा काम नहीं हो पा रहा है। पंच सरपंचों को बैठकों के लिए बुला लिया जाता है, लेकिन काम नहीं होते। कहा कि विकास के दावे झूठे हैं।
जवाबदेही लेने पर रोकना नहीं है सही
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि जो लोग अपनी वाहवाही के लिए बैठकें करते हैं, वे जनता और जनप्रतिनिधियों को बोलने से रोकते हैं। कहा कि दो दिन पहले हटली में डीसी ने नंबरदार को अपने गांव की समस्या रखने पर बुरी तरह से टोक दिया था। साथ ही चेतावनी भी दे दी गई थी। अब नगरी में जिला विकास परिषद सदस्या को समस्याएं रखने और अधिकारियों से जवाबदेही लेने पर टोका गया है। जो सही नहीं है।
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