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रंजीत सागर झील की गहराई में उतरी पनडुब्बी बचाव इकाई

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रंजीत सागर झील में उतरे नौसेना की पनडुब्बी बचाव इकाई के गोताखोर विज्ञप्ति - फोटो : KATHUA
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कठुआ। रंजीत सागर झील में दुर्घटनाग्रस्त हुए सेना के रुद्र हेलीकॉप्टर की तलाश के लिए सेना ने अभियान और तेज कर दिया है। इस अभियान को पूरा करने के लिए अब झील में भारतीय नौसेना की एक पनडुब्बी बचाव इकाई को काम पर लगाया गया है। 12 दिनों से जारी अभियान में अब तक सेना के हेलीकॉप्टर का मलबा और उसमें सवार दो पायलटों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, सेना ने दावा किया है कि दुर्घटना वाले क्षेत्र में लगभग 80 से सौ मीटर गहराई में डिजिटल रूप से हेलीकॉप्टर के मलबे का पता लगा लिया गया है।
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उधर, वायु सेना ने 13 और 14 अगस्त की मध्यरात्रि को विशाखापट्टनम से वायु सेना स्टेशन पठानकोट तक पानी के भीतर खोज और बचाव के लिए भारी उपकरणों को पहुंचा दिया है। इससे पहले 60 वर्ग मीटर के एक क्षेत्र को चिन्हित किया गया था, और कोच्चि से लाए गए विशेष सोनार उपकरण को तलाशी अभियान के लिए लगाया गया था। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय मदद लेने की बात भी कही गई थी।
सेना की पश्चिमी कमान ने 11 अगस्त को बताया था कि झील की सतह से लगभग 80 मीटर की गहराई पर मलबे की पहचान की गई है। इस अभियान में सेना के साथ नौसेना, वायु सेना, एनडीआरएफ, रंजीत सागर बांध प्रबंधन, स्थानीय प्रशासन भी शामिल है। और यह अभियान लगातार युद्धस्तर पर जारी है।
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सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जलाशय 25 किमी लंबा, आठ किमी चौड़ा और पांच सौ फुट से अधिक गहरा है। चंडीगढ़, दिल्ली, मुंबई और कोच्चि से भेजे गए मल्टी-बीम सोनार, साइड स्कैनर, दूर से संचालित वाहनों और अंडरवाटर मैनिपुलेटर्स के साथ नौसेना और सेना के विशेष बलों के गोताखोर तलाशी अभियान में शामिल हैं। खराब मौसम और बारिश के बीच भी 12 दिनों से तलाशी अभियान जारी है। बरसात के मौसम में पानी की कोलाइडल प्रकृति के कारण 50 मीटर की गहराई से नीचे लगभग शून्य दृश्यता ने इस अभियान को और चुनौतीपूर्ण बनाया है। जो सोनार और अन्य सेंसर की सटीकता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसके बावजूद हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
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