नगरी क्षेत्र में आरिश के बाद गिरी धान की फसल, संवाद।
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कठुआ। जिले में गत दिवस हुई मूसलाधार बारिश के बाद चली हवाओं से धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है। शहर से सटे अंधड क्षेत्र में तेज हवाओं से धान की लगभग तैयार हो चुकी फसल के गिर जाने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
जिले के सबसे अधिक उत्पादन क्षेत्र में गत वर्ष हुई रिकॉर्ड खरीदारी के बाद इस साल भी अच्छी पैदावार की संभावना बन रही है। किसानों ने अधिक लाभ कमाने के लिए इस बार भी धान लगाए हैं। इनमें काफी किसानों ने अलग किस्म का धान लगाया है। जोकि अब लगभग तैयार होने वाला हो गया है। लेकिन पिछले 24 घंटों में जोरदार बारिश के बाद चली हवाओं से धान की फसल खेतों में लेट गई है। इससे उत्पादन कम हो सकता है।
इस बारे में खोख्याल के किसान राकेश कुमार का कहना है कि जिन स्थानों पर पानी की उपलब्धता कम है, वहां पर किसानों ने अर्ली वैरायटी का धान लगाया था। ताकि, वह बारिश का मौसम समाप्त होते ही तैयार हो जाए, और उन्हें बाद में इसकी सिंचाई के लिए परेशान न होना पड़े। लेकिन अब धान के गिर जाने से किसानों को उत्पादन की चिंता होने लगी है। हालांकि, अगर एक-दो दिनों में मौसम साफ हो जाता है, और तेज धूप निकल आती है, तो गिरी हुई काफी फसल में सुधार भी हो सकता है। लेकिन, अभी बारिश का मौसम बाकी है। ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
नगरी क्षेत्र के किसान राजकुमार का कहना है कि समय के साथ खेती में काम करने वाले मजदूरों की संख्या में कमी आती जा रही है। इसी के कारण अब इलाके के किसानों ने अपनी फसल की कटाई के लिए मशीनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। अगर गिरी हुई फसल में दाने आ भी जाते है तो उसकी मशीन से कटाई संभव नहीं हो पाएगी। जोकि किसानों की सबसे बड़ी परेशानी होगी। क्योंकि, धान के तैयार होने के बाद अगर उसकी समय से कटाई न की जाए, तो धान के बीज खेत में ही गिरना शुरू हो जाते है। ऐसे में धान का खेत में गिर जाना किसी भी तरह किसान के लिए लाभकारी नहीं है।