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नरसिंह मंदिर में हुए वार्षिक भंडारे में शामिल हुए श्रद्धालु

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रथखड़ा मेले के दौरान आयोजित भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते श्रद्धालु। संवाद - फोटो : KATHUA
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बिलावर। उपमंडल के कोहग गांव के ऐतिहासिक नरसिंह मंदिर में सोमवार को वार्षिक भंडारे का आयोजन किया गया। सबसे पहले मंदिर में विराजमान भगवान नरसिंह को स्नान करवा कर विधिवत तरीके से नए वस्त्र आभूषण पहनाए गए। इसके बाद उनकी पूजा-अर्चना की गई। मंदिर परिसर में विश्व शांति की कामना को लेकर हवन का आयोजन किया गया। इसमें विष्णु भगवान के कई भक्तों ने आहुतियां देकर प्रभु का गुणगान किया। पूर्ण आहुति देने के बाद सर्वप्रथम भगवान विष्णु को भोग लगाया गया। इसके बाद भंडारा लोगों के लिए सुबह 8:30 बजे खोल दिया गया जो देर शाम तक जारी रहा।
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भंडारे में आसपास के कई इलाकों के साथ-साथ स्थानीय गांव से आए हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। नरसिंह मंदिर कमेटी के प्रधान मदन लाल, सरपंच अमरीक सिंह, विनोद सिंह ने बताया के हर वर्ष रथ खड़ा के उपलक्ष्य पर मंदिर में वार्षिक भंडारा आयोजित किया जाता है और यह प्रथा सैकड़ों वर्षों से चलती आ रही है। कोहग गांव का प्राचीन ऐतिहासिक नरसिंह मंदिर राष्ट्रीय एकता, राष्ट्रीय समानता और भाईचारे का प्रतीक है। इस मंदिर की विशेषता यह है की मंदिर में विराजमान नरसिंह भगवान की पवित्र पिंडिंयों का पुजारी कोई पंडित या ब्राह्मण या साधु संत नहीं है बल्कि स्थानीय गांव का एक अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाला भगत परिवार है। इस परिवार के सदस्य सदियों से भगवान श्री नरसिंह की पूजा करते आ रहे हैं। यूं तो मंदिर में हर दिन कई लोग शीश झुकाते हैं, लेकिन रथ खड़े के दिन मंदिर में भगवान के दर्शन करने के लिए कई अन्य इलाकों से भी भक्त पहुंचते हैं। मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में मांगी गई मनोकामना को नरसिंह भगवान पूरा करते हैं।
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