जिला कठुआ के बसोहली, बनी और सरथल में पर्यटन को बढ़ावा देने की कवायद तेज हो गई है। केंद्र सरकार को भारत दर्शन चरण-2 के तहत 300 करोड़ रुपये की परियोजनाएं बनाकर भेजी गई हैं, जिनसे इन इलाकों के दिन बहुरेंगे। पर्यटन बढ़ने के साथ रोजगार के द्वार खुलेंगे। दरअसल इस टूरिज्म सर्किट को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से बनी बसोहली विकास प्राधिकरण का गठन किया गया है।
बीते कुछ वर्षों में पर्यटन की गतिविधियां तो इलाके में शुरू हुईं, लेकिन ज्यादा बदलाव नहीं ला पाईं। इस बार परियोजना में आम लोगों के मनोरंजन से लेकर स्थानीय रोजगार और होम स्टे की व्यवस्था को तरजीह दी गई है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि भारत दर्शन का यह चरण-2 बसोहली से बनी और फिर सरथल से भद्रवाह सर्किट को जोड़कर सीधा हिमाचल और पंजाब के पर्यटकों को आकर्षित कर पाएगा।
इन पर होगा काम
परियोजना में अटल सेतु से लेकर पुरथु तक साढे़ सात किलोमीटर पैदल रास्ता (पाथ-वे) होगा। यहां लाइटिंग और ओपन जिम की भी व्यवस्था होगी। कॉफी, टी शॉप और टॉयलेट कांप्लेक्स भी बनाया जाएगा। सरकार का प्रयास है कि पर्यटन स्थल पुरथु का जलस्तर कम पर यहां टेंटेड कॉलोनी स्थापित की जाए। मिनी गोवा के नाम से प्रसिद्ध पुरथु को विकसित किया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक बसोहली का रुख करें। सरथल में टेंट कॉलोनी भी स्थापित की गई है, जहां पर 25 टेंट स्थापित किए गए हैं। 25 और टेंट स्थापित किए जाने की योजना है। पर्यटन सीजन के दौरान भारी संख्या में पर्यटकों की आमद पर आवासीय व्यवस्था न होने से उनको निराश लौटना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
बसोहली-बनी विकास प्राधिकरण के अधीन बसोहली, बनी और सरथल का इलाका आता है। बसोहली में पर्यटक स्थल पुरथु में काफी संख्या में पर्यटक आते हैं। इसी के तहत पुरथु में एक फ्लोटिंग जेट्टी (बोट खड़ी करने के लिए) लगाई जा रही है, जिसके साथ सोलर लाइटें भी लगाई जाएंगी। कूड़ेदान और शौचालय भी बनेंगे। बसोहली में वाटर स्पोर्ट्स की गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी।
पर्यटन विस्तार के लिए यदि कोई निजी तौर पर अपना ढांचा लगाकर काम करना चाहता है तो उसको अनुमति के साथ-साथ सहयोग भी किया जाएगा। भारत दर्शन के दूसरे चरण के तहत 300 करोड़ रुपये की लागत से जो परियोजना बनाई गई है। यह बसोहली, बनी और सरथल के पर्यटन क्षेत्रों को विकसित करने के लिए है, जिप लाइन पैराग्लाइडिंग आदि के लिए प्रशिक्षित लोग संपर्क कर रहे हैं। कुछ सुझावों के संबंध में उच्च अधिकारियों को भी अवगत करवाया जा चुका है।
-अजीत सिंह, सीईओ, बसोहली-बनी विकास प्राधिकरण।