जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों में बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ बहुभाषी बनाने के लिए सरकार ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत कक्षा एक से 12 तक के बच्चों को देश की दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली तमिल भाषा लिखने, पढ़ने और बोलने में समृद्ध किया जाएगा। एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान के तहत इस पहल को शुरू किया है। स्कूलों में बच्चों को तमिल भाषा के मूल शब्दों के साथ वहां की संस्कृति का भी अध्ययन करवाया जा रहा है।
सभी स्कूलों में इस तरह की गतिविधियां शुरू की गई हैं। सुबह की प्रार्थना के समय 15 मिनट तक बच्चों को इस तरह की गतिविधियों से जोड़ा जाता है। शिक्षक इंटरनेट की मदद से बच्चों को तमिलनाडु की भाषा और संस्कृति सिखाते हैं।
साथ ही तमिलनाडु के कुछ शिक्षित तमिल भाषा में शैक्षणिक सामग्री यहां भेजते हैं। इसमें वहां के प्राचीन और पारंपरिक त्यौहार, नृत्य, लोक गीत आदि के बारे में बताया जा रहा है। अभी तक स्कूलों में हिंदी, अंग्रेजी, डोगरी, उर्दू का ज्ञान ही बच्चों को दिया जाता था। अब ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के तहत भाषा संगम की शुरूआत की गई है।
इसमें बच्चों को तमिल भाषा का ज्ञान दिया जा रहा है। दोनों प्रदेशों के बच्चे एक दूसरे के राज्य की संस्कृति, लोक संगीत, भाषा और प्राचीन त्यौहार के बारे में जान सकेंगे।