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एक कर्मचारी पर 12 हजार श्रमिकों के लेबर कार्ड के नवीनीकरण का बोझ

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कठुआ। श्रमिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए सरकार ने लेबर कार्ड तो जारी कर दिए, लेकिन इसके नवीकरण के लिए लाभार्थियों को दिहाड़ी से भी ज्यादा पसीना बहाना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि जिले में 12 हजार से अधिक पंजीकृत भवन निर्माण श्रमिकों को अपने कार्ड नवीकरण के लिए सप्ताह में केवल एक ही दिन है। इसके लिए मात्र एक कर्मचारी को ही जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं मजदूरों के बढ़ते रोष को देखते हुए मंगलवार को पुलिस भी बुलानी पड़ी।
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मंगलवार को जिला श्रम कार्यालय में अपने लेबर कार्ड का नवीनीकरण करवाने के लिए हीरानगर के सीमावर्ती गांव से आए कुंदन लाल ने बताया कि कार्यालय में लेबर कार्ड के नवीनीकरण के लिए सप्ताह में एक दिन का समय रखा गया है। आनलाइन होने वाली इस प्रक्रिया के तहत हर मजदूर के फाइल में संलग्न उसके आधार कार्ड की प्रति, बैंक पासबुक, जन्मतिथि प्रमाण पत्र के साथ लेबर कार्ड की स्कैनिंग की जाती है। इसके लिए एकमात्र काउंटर होने के कारण वहां जिला भर से आने वाले मजदूरों की कतार लग जाती है।
कोरोना के इस दौर में जब सरकार लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग रखने की नसीहत देती है, तो वहीं इस कार्यालय में आने वाली मजदूरों की भीड़ के बीच इस नियम की धज्जियां उड़ती दिखती है। वहीं ऐसे हालात में चंद मजदूरों के आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो पाती है। इस कारण जिला भर से आए मजदूरों को अपना काम करवाए बिना ही कार्यालय से वापस जाना पड़ता है। इसमें उनका पैसा और समय दोनों बर्बाद हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से व्यवस्था में सुधार किए जाने की मांग की।
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एक साथ मजदूरों के आने से बनी समस्या
इस संबंध में सहायक श्रम आयुक्त बृजनेश कुमारी की मानें तो जिला में 12 हजार के करीब पंजीकृत मजदूर हैं। कार्यालय में कर्मचारियों की कमी के कारण सप्ताह के सातों दिन लेबर कार्ड के नवीनीकरण की सुविधा उपलब्ध करवा पाना संभव नहीं है। पूरे जिले से एक साथ मजदूरों के आने से समस्या बनी थी। इसमें सुधार करने का प्रयास किया जा रहा है।
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