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अवैध कॉलोनियों के मामले में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

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कठुआ। कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनी मामले में प्रशासन की ओर से जमीन मालिकों को नोटिस जारी करने की कार्रवाई शुरू हो गई है। पिछले कुछ वर्षों में कृषि जमीनों को बदलकर तैयार की गई कॉलोनियों की रिपोर्ट प्रशासन की ओर से पटवारियों से तलब की गई थी। मंडलायुक्त राघव लंगर के निर्देश के बाद डीसी कठुआ राहुल यादव ने सभी तहसीलदारों को निर्देश दिए कि कृषि जमीनों को अवैध रूप से कॉलोनी बनाकर बेचने वालों को नोटिस जारी किए जाएं। सोमवार से यह प्रक्रिया शुरू हो गई है। कठुआ तहसील में ही अबतक एक दर्जन से अधिक ऐसी कॉलोनियों की पहचान हो गई है जो कृषि जमीनों पर तैैयार की गई हैं। जबकि जमीनी स्तर पर आंकड़ा इससे कहीं अधिक है। जिले की अन्य तहसीलों में भी प्रशासन ऐसी कॉलोनियों पर कार्रवाई करने की तैयारी में है।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार अबतक एक दर्जन के लगभग जमीन मालिकों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। डीसी कठुआ राहुल यादव ने बताया कि कृषि जमीनों पर बनाई गई कॉलोनियों के मामले में तहसीलदारों को नोटिस जारी करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। उल्लंघनकर्ताओं को कतई बख्शा नहीं जाएगा। तहसीलदार कठुआ विक्रम सिंह ने बताया कि डीसी कठुआ से मिले निर्देश के बाद कृषि जमीनों पर बनी कॉलोनियों के असल मालिकों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि यह नोटिस जमीन के मालिकों को जारी किए जा रहे हैं।
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राजस्व विभाग की मिलीभगत से हुआ पूरा खेल
कृषि जमीनों पर पिछले पांच सालों में बड़े पैमाने पर तैयार की गई अवैध कॉलोनियों के मामले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। मंडलायुक्त जम्मू की ओर से जम्मू में हाल में हुई कार्रवाई के बाद उम्मीद जताई जा रही है प्रापर्टी डीलरों के साथ मिलकर अवैध कॉलोनियों का खेल खेल रहे राजस्व विभाग के कई कर्मचारी भी कटघरे में होंगे। दरअसल जिले में अवैध रूप से तैयार दर्जनों कॉलोनियों में मोटी कमाई और राजस्व को नुकसान पहुंचाने का बड़ा खेल राजस्व विभाग के कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों की मिलीभगत से हुआ है। पटवारियों से लेकर नायब तहसीलदारों और पूर्ववर्ती तहसीलदारों की भूमिका भी शक के घेरे में है। कठुआ शहर के आसपास ही पिछले पांच वर्षों में दर्जनों अवैध कॉलोनियों विकसित की गई हैं। इन कॉलोनियों में बिना सुविधाओं के भी भू माफिया ने मुंह मांगे दाम हासिल किए और राजस्व में सेंध लगाई है। अब होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई का खामियाजा जमीन के मालिक और खरीदार भुगतने वाले हैं। चूंकि यह नोटिस मालिकों को जारी हुए हैं जबकि खरीदारों की जमीनों की रजिस्ट्री अधर में लटक गई है।
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