केबल नेटवर्क पर चलने वाले न्यूज चैनलों पर प्रतिबंध लगाने के मामले ने सोमवार को तूल पकड़ लिया। एडीशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के नोटिस का कानूनी जवाब देने गए वकील की एडीएम के साथ कहासुनी हो गई।
मामला इतना बढ़ गया कि पहले एडीएम कार्यालय में जोरदार हंगामा हुआ जिसके बाद कोर्ट परिसर में आपात बैठक कर वकीलों ने बेमियादी हड़ताल का ऐलान कर दिया।
उधर वकील पर एडीएम के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए चुनावी ड्यूटी का सारा स्टाफ कामछोड़ हड़ताल पर चला गया। देर शाम जिला चुनाव अधिकारी कार्यालय कांप्लेक्स के बाहर मुलाजिमों ने जोरदार प्रदर्शन कर बेमियादी हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया।
मामला केबल नेटवर्क के न्यूज चैनलों पर प्रतिबंध लगाने से शुरू हुआ। सोमवार को न्यूज चैनल के प्रबंधक निदेशक के वकील एडीएम कार्यालय पहुंचे। वकील ने आरोप लगाया कि उन्हें एडीएम ने पहले तो कार्यालय के भीतर नहीं आने दिया।
बाद में जब वह दस्तावेजों के साथ भीतर गए तो एडीएम ने मोबाइल जब्त करवाकर हिरासत में लेने की चेतावनी दे दी। इसका उन्होंने विरोध किया। वकील के अनुसार उन्हें एडीएम कार्यालय में कुछ देर तक जबरन कैद रखा गया।
वहीं एडीएम जी प्रसन्ना रामास्वामी ने कहा कि वकीलों ने उनके साथ कार्यालय के भीतर आकर बदसलूकी की है। न सिर्फ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया बल्कि हिंसक तेवर भी दिखाए गए।
उन्होंने कहा कि वकील जो दस्तावेज लेकर आए थे वह उन्हें पूरी तरह से पढ़ नहीं पाए हैं लेकिन कार्यालय के भीतर जो हंगामा किया गया है उस पर कानूनी संज्ञान लिया जाएगा।
उधर एडीएम कार्यालय के बाद जिला न्यायालय परिसर पहुंचे प्रदर्शनकारी वकीलों ने बार एसोसिएशन के साथ आपात बैठक की। एडीएम के रवैए को तानाशाही करार देते हुए बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बलबीर सिंह ने कहा कि यदि अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो हड़ताल बेमियादी चलती रहेगी।
इस बीच डीसी कार्यालय में चुनाव ड्यूटी पर तैनात अमला भी बिफर पड़ा। नायब तहसीलदार मोहम्मद अली मुगल के नेतृत्व में नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारी मुलाजिमों ने कहा कि इलेक्षन स्टाफ में शामिल पंद्रह सौ मुलाजिम वकील पर कार्रवाई नहीं होने तक इलेक्षन ड्यूटी पर नहीं लौटेंगे।