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एक चपरासी जो बन गया सॉफ्टवेयर कंपनी का मालिक

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चंडीगढ़ के छोटू शर्मा का संघर्ष बहुतों को प्रेरणा देता है। आगे बढ़ने की ललक में छोटू ने दिन भर दफ्तर में चपरासी गिरी की और रातों को भूखे पेट जाग कर पढ़ाई की। आज यही छोटू शर्मा चंडीगढ़ में दो सॉफ्टवेयर कंपनियों का मालिक है।
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हिमाचल प्रदेश के एक गांव में जन्मे छोटू ने सरकारी कॉलेज से बीए पास तो किया लेकिन इस डिग्री के बल पर उसे कोई नौकरी नहीं मिली। नौकरी की तलाश में छोटू चंडीगढ़ जा पहुंचा लेकिन वहां भी बिना व्यवसायिक कोर्स किए कोई नौकरी देने के तैयार नहीं था। छोटू खाली हाथ घर नहीं लौटना चाहता था और चंडीगढ़ जैसे महंगे शहर में बिना कुछ कमाए जीवन यापन मुश्किल था।

तब छोटू ने फैसला किया कि कंप्यूटर कोर्स करके कंप्यूटर के बल पर ही कैरियर बनाना है। पेट भरने के लिए उसने एक स्थानीय कंप्यूटर सेंटर 'एपटेक' में चपरासी की नौकरी कर ली। इसी के साथ उसने कंप्यूटर क्लास भी ज्वाइन कर ली। वो दिन भर कंप्यूटर सेंटर में चपरासी का काम करता और रात को जागकर पढ़ाई करता। छोटू दिन भर कंप्यूटर सेंटर में रहता, जैसे ही कोई कंप्यूटर खाली मिलता, छोटू उस पर प्रैक्टिस शुरू कर देता।
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एक साल के कंप्यूटर कोर्स की फीस भरने के लिए चपरासी की नौकरी की सैलरी कम थी। पैसे जमा करने की कवायद में कई बार छोटू को भूखे पेट सोना पड़ता था। दरअसल वो जानता था कि हिमाचल में तंग हालातों में जी रहा उसका परिवार उसकी कोई मदद नहीं कर पाएगा, इसलिए वो अपनी तंगहाली की खबर अपने परिजनों को नहीं बताता था।

दिन भर कंप्यूटर सेंटर में रहने के कई फायदे हुए। नौकरी के साथ साथ छोटू अपने कोर्स की प्रैक्टिस भी करता और वहां प्रैक्टिस कर रहे छात्रों को भी कंप्यूटर कोर्स की बातें सिखाता। धीरे धीरे छोटू में कंप्यूटर टीचिंग की क्षमता उत्पन्न हो गई।
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