बिलावर। इलाके में सूखे जैसे हालात होने से गेहूं की फसल पर भयंकर मार पड़ रही है। जिसके कारण फसल का उत्पादन इस वर्ष 30% घटने की आशंका है। स्थानीय किसानों का कहना है कि इलाके के 90% किसान केवल बारिश के पानी पर निर्भर रहकर फसलें करते हैं। मौसम अनुकूल रहने पर कई बार पैदावार अच्छी हो जाती है, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में नुकसान भी उठाना पड़ता है। किसानों के अनुसार गेहूं इलाके की प्रमुख फसल है। बीते दो माह से बारिश न होने से गेहूं के दाने का आकार नहीं बढ़ पाया है।
मैदानी इलाकों में 15 अप्रैल तक गेहूं की कटाई का काम शुरू हो जाएगा। ऐसे में अगर आखिरी समय में बारिश होती है तो तैयार फसल भी खराब होने का डर है। स्थानीय किसान जयवर्धन सिंह, सरदारी लाल, प्रेमनाथ, रत्नचंद, गिरधारी लाल आदि किसानों ने बताया कि करीब दो माह पहले इलाके में बारिश हुई थी। जिसके बाद बारिश न होने से गेहूं की फसल को मार पड़ी है। किसानों ने कहा कि गेहूं के दानों का आकार नहीं बढ़ पाया है। जिससे उत्पादन में कमी आएगी और बीज भी कमजोर होगा। बतादें कि उपमंडल के निचले इलाकों में गेहूं की फसल लगभग पकने को तैयार है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में अभी फसल पकने में 15 दिन से अधिक और समय लगा जाएगा। संवाद