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जम्मू-कश्मीर: पुंछ में आठ साल बाद सेना पर बड़ा आतंकी हमला, जानिए इससे पहले कब-कब हुए थे जवान शहीद

Tue, 12 Oct 2021 01:34 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

सर्च ऑपरेशन के दौरान जम्मू संभाग में पहली बार अफसर समेत पांच जवान खोए। इससे पहले अगस्त 2013 में पांच जवान बैट हमले में हुए थे शहीद।

 
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भारतीय सेना के जवान (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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विस्तार
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पुंछ के सुरनकोट में हुई मुठभेड़ में भारतीय सेना के पांच जवान शहीद हो गए। सेना को आठ साल बाद पुंछ में इतना बड़ा नुकसान पहुंचा है। कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन (कासो) के दौरान सेना को बिना किसी आतंकी ढेर किए पहली बार इतनी बड़ी क्षति पहुंची है। इससे पहले 4 मई 2020 को कश्मीर के हंदवाड़ा में सेना ने कासो के दौरान एक कर्नल समेत 6 जवान खो दिए थे, लेकिन इस ऑपरेशन में चार आतंकी भी मारे गए थे।

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जानकारी के अनुसार जम्मू संभाग में कासो के दौरान यह सेना को पहला बड़ा नुकसान है। हर साल सेना की ओर से 120 से 130 सर्च ऑपरेशन राजोरी, पुंछ, सुंदरबनी, सुरनकोट, मेंढर और नौशेरा में एलओसी पर चलाए जाते हैं, लेकिन एक साथ कभी इतने जवान शहीद नहीं हुए। इसी वर्ष सुंदरबनी में एक जेसीओ और दो जवान शहीद हुए थे। जबकि इसी साल थन्नामंडी में एक जेसीओ शहीद हो गया था। पुंछ के चकां दा बाग में 7 अगस्त 2013 को पाकिस्तानी सैनिकों ने आतंकियों के साथ मिलकर बैट हमला कर पांच जवानों को शहीद कर दिया था। इसके अलावा जम्मू संभाग में पिछले 10 सालों में कई बार फिदायीन हमले हुए हैं।

यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: शोपियां के तुलरन में तीन आतंकियों के खात्मे के बाद फेरीपोरा में मुठभेड़, एक आतंकी ढेर
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भविष्य में ऐसा दोबारा न होने को लेकर मंथन
इस तरह से कासो में सेना को इतने बड़े नुकसान को लेकर चिंता का विषय बन गया है। यह देखा जा रहा है कि कहां चूक हो गई। सूत्रों का कहना है कि कासो के दौरान कार्रवाई में बदलाव को लेकर सेना के उच्च स्तर पर मंथन चल रहा है। सेना ने तीन साल पहले यह तय भी किया था कि आतंकियों से निपटते हुए कम से कम नुकसान की रणनीति पर काम होगा।
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10 दिनों से क्षेत्र में छुपकर बैठे हैं आतंकी
सूत्रों का कहना है कि पुंछ के सुरनकोट में घेरे गए आतंकी पिछले 10 दिन से छुपकर बैठे हुए हैं। यह आतंकी एलओसी से घुसपैठ करके आए थे। ये आतंकी मुगल रोड से कश्मीर जाने की फिराक में हैं। जिस जगह आतंकी घेरे गए हैं, वह काफी घना जंगल है। यह क्षेत्र मुगल रोड रास्ते पर डेरा की गली से बफलियाज के बीच है। इस क्षेत्र में एक बार आतंकियों ने एक जज की हत्या भी कर दी थी।

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