प्रदेश में खेल सुविधाओं की कमी और प्रोत्साहन न मिलने के कारण यहां के खिलाड़ी पंजाब, हरियाणा में प्रशिक्षण ले रहे हैं। क्योंकि उन्हें प्रदेश में न तो उस स्तर के एकेडमी मिलती है और न ही कोच। ओलंपिक और एशियन गेम्स में शामिल खेलों के तो प्रदेश में कोच ही नहीं है। ऐसे में खिलाड़ी बाहरी राज्यों का रुख कर रहे हैं। प्रदेश में कुश्ती, एथलेटिक, बॉक्सिंग, वेटलिफ्टिंग जैसे मुख्य खेलों में सुविधाओं का बड़ा अभाव है।
इनके न तो ट्रेनिंग सेंटर हैं न ही कोच। ऐसे में मेडल के दावेदार खिलाड़ी हरियाणा और पंजाब का रुख कर रहे हैं। वेटलिफ्टिंग में 20 वर्ष पुरानी खेल सामग्री से प्रशिक्षण ले रहे हैं। वेटलिफ्टिंग एसोसिएशन के महासचिव युद्धवीर सिंह ने कहा कि सरकार ग्रामीण स्तर तक खेल ढांचे को बढ़ाने की बात करती है। लेकिन वेटलिफ्टिंग की ही बात करें, तो प्रदेश में एक भी कोच नहीं है। 20 वर्षों से खेल सामग्री नहीं खरीदी है।
वहीं जम्मू-कश्मीर ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव आशुतोष शर्मा ने कहा कि स्पोर्ट्स काउंसिल में बदलाव की जरूरत है। काउंसिल में शासी निकाय समिति का गठन नहीं हुआ। काउंसिल ऐसे खेल संघों को पैसा देती है, जो ओलंपिक या एशियन गेम्स में शामिल ही नहीं है। स्पोर्ट्स काउंसिल को खेल संघों को साथ लेकर चलना होगा।
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पांच वर्षों से खेल कोटे में नौकरी नहीं
स्पोर्ट्स काउंसिल एसआरओ 349 के तहत हर वर्ष 25 पदक विजेता खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देता है। लेकिन पांच वर्षों से खिलाड़ियों को नौकरी नहीं मिली है। मेडल जितने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन नहीं मिलता है। एथलेटिक ट्रैक नहीं है। जम्मू-कश्मीर के पास खेल नीति भी नहीं है।