पिछले दो साल में वैश्विक स्तर पर कोविड महामारी झेल रहे जम्मू-कश्मीर के बच्चों की मानसिकता, व्यवहार और सोच में भी कई बदलाव आए हैं। स्कूल बंद रहने से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ा है। उन्हें पहले की तरह दोस्तों के साथ खेलने-कूदने और पढ़ने का अवसर नहीं मिला। घर पर रहते टीवी या स्मार्टफोन पर भी उनका अधिक समय बीता है। ऑनलाइन पढ़ाई में स्मार्टफोन पहली प्राथमिकता बनने के साथ इंटरनेट एडिक्शन बढ़ा है।
कई बच्चे ऐसे भी हैं जो खाना खाते भी स्मार्टफोन देख रहे हैं, ऐसी स्थिति में वे या तो क्षमता से अधिक खाना खा जाते हैं या कम। दोनों ही स्थितियों में मोटापा और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बन रही हैं। अब अधिकांश बच्चे भौतिक शैक्षणिक गतिविधियों को भूलकर ट्यूशन जाने से भी परहेज करने लगे हैं। इसके लिए नए बहाने तलाशे जा रहे हैं। खासतौर पर छोटे बच्चों की मानसिकता पर अधिक असर पड़ा है। मनोचिकित्सकों के पास अभिभावक अपने लाडलों की ऐसी कई समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं।
केस -1
शहर की एक पॉश कालोनी का निवासी सात वर्षीय राहुल पहली कक्षा में पढ़ाई कर रहा है। शुरुआत में उसका पढ़ाई में काफी रुझान था। लेकिन कोविड के कारण पिछले दो साल से वे स्मार्टफोन से ऑनलाइन पढ़ाई कर रहा है। शुरू में तो यह जरूरत दिखी, लेकिन अब वे नेट एडिक्ट हो गया है। कई घंटों तक फोन से जुड़े रहने के कारण उसकी आंखों में समस्या आई है। फोन हटाने पर उसमें चिड़चिड़ापन बन गया है। वह मानसिक तौर पर स्मार्ट फोन के जीवन को ही असली मान रहा है।
केस -2
पुराने शहर की निवासी आठ वर्षीय रागिनी दूसरी कक्षा की छात्रा है। शुरुआती पढ़ाई में वह सामान्य तौर पर ठीक थी। लेकिन पिछले दो साल से आनलाइन पढ़ाई और उसकी आउटडोर गतिविधियां बंद होने से मोटापापन आ गया है। घर वाले बच्ची के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। ऑनलाइन पढ़ाई करने से उनकी लर्निंग गतिविधियां कम हुई हैं। वह अधिकांश स्मार्टफोन पर की जाने वाली पढ़ाई को ही असली समझ रही है। उसकी तरह बड़ी संख्या में बच्चों के व्यवहार में भी ऐसी समस्याएं आ रही हैं।
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किसी भी आपदा के लंबा खींचने पर उसके बाद में सामाजिक स्तर पर दुष्परिणाम देखने को मिलते हैं। पिछले दो साल से ऑनलाइन पढ़ाई से खासकर छोटे बच्चों की मानसिकता पर अधिक असर पड़ा है। वे लर्निंग प्रक्रिया दूर होकर स्मार्टफोन की पढ़ाई को ही रियल मानने लगे हैं। इससे अब स्कूल खुलने की सूरत में बड़े पैमाने पर विशेषतौर पर छोटे बच्चों में ऐसी शारीरिक और मानसिक समस्याएं आएंगी। इसमें वे स्कूल जाने से परहेज करेंगे और नए बहाने बनाकर स्मार्ट फोन की पढ़ाई को प्राथमिकता देंगे। इससे उन्हें दोबारा स्कूल की पढ़ाई से जुड़ने में ज्यादा वक्त लगेगा। - डॉ. जगदीश थापा, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, जम्मू
बच्चों के व्यवहार से सतर्क रहें अभिभावक
कोविड महामारी अभी जारी है, जाहिर है स्कूल भी बंद रहेंगे और ऑनलाइन पढ़ाई भी होगी। ऐसे में बच्चों को इस स्थिति से बचाने के लिए अभिभावकों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। वे बच्चे की गतिविधियों पर ध्यान रखें। उससे भावनात्मक रूप से जुड़े। उससे संवाद बढ़ाएं, उसे साथ लेकर घर परिवार का काम करें या शारीरिक श्रम करें, ताकि वह शारीरिक रूप से मजबूत रहे।
अपने तनाव को बच्चों पर प्रदर्शित न करें
कोरोनाकाल में सभी वर्ग के लोगों को विभिन्न कारणों से तनाव मिला है। लेकिन अभिभावक अपने तनाव को बच्चों पर प्रदर्शित न करें, जिससे उसका मानसिक संतुलन बिगड़े।
बच्चों में खेलों आदि की रुचि पैदा करें
बच्चों में पढ़ाई के साथ अन्य कार्यों के लिए रुचि पैदा करें। खेलों, रचनात्मक कला के माध्यम से उनकी सामान्य दिनचर्या को उत्साहपूर्ण बनाने का प्रयास करें। इन सभी गतिविधियों से बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होगा।