प्रदेश में जैविक खेती का दायरा सिमट गया है। सिर्फ 15 हजार हेक्टेयर पर ही जैविक खेती हो रही है। जबकि दो लाख हेक्टेयर में खेती होती है। साल 2010 से जैविक ढंग से खेती करने के लिए कवायद शुरू हुई। इसके बाद किसानों को जागरूक किया गया और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए योजनाएं भी चलाई गईं।
मौजूदा समय में कृषि विभाग और स्कॉस्ट जम्मू जैविक खेती को बढ़ावा देने पर काम कर रहे हैं। विभाग की ओर से सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है। इसमें किसानों को खाद बनाने के लिए गड्ढा और खाद सब्सिडी पर मुहैया करवाई जा रही है।
वहीं, स्कॉस्ट जम्मू सेमीनारों और कार्यक्रमों का आयोजन कर किसानों को जागरूक कर रहा है। कम इलाके में खेती होने के पीछे किसानों का जागरूक न होना है। अभी तक रसायन खादों का प्रयोग ही खेती में किया जा रहा है। अब फिर से कृषि विभाग सब्सिडी जैविक खेती पर मुहैया करवाएगा। इसके लिए किसानों से संपर्क किया जाएगा।
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कृषि निदेशक केके शर्मा ने कहा कि योजनाओं के तहत खेती पर सब्सिडी दी जा रही है। इसका लाभ किसान उठाएं। इससे शरीर पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। स्कॉस्ट जम्मू के शोध निदेशक ने बताया कि किसानों को सेमीनारों के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। योजना का लाभ किसान उठाएं और जैविक खेती करें।