राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर की सफाई व्यवस्था से जुड़े मामले में नगर निगम से पूछा है कि क्यों न अदालती आदेश की पालना सुनिश्चित करने के लिए कमेटी गठित कर याचिकाकर्ता को ही उसका समन्वयक नियुक्त कर दिया जाए। इसके साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद रखी है।
न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश अधिवक्ता विमल चौधरी की ओर से दायर दो अवमानना याचिकाओं पर संयुक्त रूप से सुनवाई करते हुए दिए।
याचिकाओं में कहा गया कि हाईकोर्ट ने गत 31 मई 2012 शहर की सुचारू सफाई व्यवस्था के लिए 16 बिन्दुओं पर दिशा-निर्देश जारी किए थे। जिसके तहत हर वार्ड में कम से कम सौ सफाईकर्मी नियुक्त कर सातों दिन सिंगल टायर सिस्टम से सफाई करने और कार्रवाई के लिए मजिस्ट्रेट नियुक्त करने थे।
वहीं पांच अगस्त 2015 को अदालत ने नगरीय विकास कर वसूलने के संबंध में आदेश जारी किए। याचिका में कहा गया कि नगर निगम दोनों आदेशों की ही पालना नहीं कर रहा है। इस पर निगम की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट ने एक ही याचिका में अलग-अलग आदेश दिए थे। ऐसे में दो अवमानना याचिकाएं पेश नहीं हो सकती। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना की अदालती आदेश की पालना नहीं हो रही है। ऐसे में अदालत ने कमेटी गठित कर याचिकाकर्ता को कमेटी समन्वयक नियुक्त करने के संबंध निगम से जवाब मांगा है।