राजस्थान हाईकोर्ट ने रीट के अंकों के आधार पर की जा रही तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती-2016 को रद्द कर दिया है।
अदालत ने कहा है कि केवल रीट के अंकों के आधार पर विषयवार अध्यापकों की भर्ती अव्यवहारिक है। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह संबंधित विषय के अध्यापकों की भर्ती के लिए मापदंड तय कर चार माह में पुन:भर्ती निकाले। मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नन्द्राजोग और न्यायाधीश एसपी शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश मनीष मोहन बोहरा व अन्य की ओर से दायर अपीलों की सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने कहा कि तृतीय श्रेणी अध्यापक की द्वितीय श्रेणी अध्यापक के तौर पर पदोन्नति भी होती है। ऐसे में उसके पास संबंधित विषय की पात्रता ही नहीं है तो उसकी पदोन्नति अव्यवहारिक हो जाएगी। अदालत ने कहा कि रीट के आधार पर विषय विशेष में पात्रता का निर्धारण उचित नहीं है। सरकार को ऐसा मापदंड तय करना चाहिए, जिससे संबंधित विषय में निपुण अभ्यर्थी का चयन हो सके।
अपील में कहा गया कि राज्य सरकार ने तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती-2016 लेवल 2 के विषयों के लिए भर्ती निकाली। इसके लिए संबंधित विषय के साथ रीट उतीर्ण करने वालों को पात्र माना गया, चाहे स्नातक और बीएड पाठ्यक्रम में संबंधित विषय हो या नहीं। जिसे चुनौती देते हुए कहा गया कि रीट के प्राप्तांकों के आधार राज्य सरकार की ओर से मैरिट बनाई जा रही है। रीट में डेढ़ सौ अंकों की परीक्षा होती है, जिसमें भाषा विषय का भाग तीस अंकों का ही होता है। ऐसे में उस अभ्यर्थी को कैसे पात्र माना जा सकता है, जिसने स्नातक और बीएड में संबंधित भाषा का अध्ययन ही नहीं किया है।
अपीलार्थियों के पास स्नातक और बीएड में अंग्रेजी विषय थे। ऐसे में उन्हें रीट में अंग्रेजी नहीं होने के आधार पर अपात्र नहीं माना जा सकता। वहीं, एक अन्य अपील में कहा गया कि उसने भर्ती विज्ञापन की शर्त के अनुसार अंग्रेजी के साथ रीट उतीर्ण की है। ऐसे में उसे स्नातक और बीएड में अंग्रेजी नहीं होने के आधार पर अपात्र नहीं किया जा सकता।
इस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने भर्ती को रद्द करते हुए चार माह में नए सिरे से भर्ती विज्ञापन जारी करने के आदेश देते हुए राज्य सरकार को मापदंड तय करने के आदेश दिए हैं।