राजस्थान यूनिवर्सिटी में एआईसीटीई और यूजीसी के नियमों के विपरीत सैल्फ फाईनेसिंग के तहत टैक्नोलॉजी, मैनेजमेंट और पांच वर्षीय लॉ कोर्स में अयोग्य शिक्षक तैनात करने, नियमित शिक्षकों को ही गेस्ट फैकल्टी के तौर पर करोड़ों रुपयों का भुगतान का मामला सामने आया है।
इस पर राजस्थान हाईकोर्ट ने आर.ए.पोद्दार इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, सेंटर फॉर कनवर्जिंग टैक्नोलाजी, पांच वर्षीय लॉ कॉलेज के निदेशक और यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार से जवाब तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नान्द्रजोग और न्यायाधीश वी.के.व्यास ने यह अंतरिम आदेश प्रो. आर. बी.सिंह और डॉ.एस.एन.सिंह की जनहित याचिका पर दिए। एडवोकेट एस.एस.होरा ने कोर्ट को बताया कि यूनिवर्सिटी में सेल्फ फाईनेसिंग योजना के तहत सेंटर फॉर कनवर्जिंग टैक्नोलॉजी संचालित किया जा रहा है। इसमें बॉयो टेक्नोलॉजी, नैनो टेक्नोलॉजी और इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी जैसे सुपर स्पेश्यलिटी विषय पढाए जा रहे हैं, लेकिन बीटेक की डिग्री मनोविज्ञान से संबंधित विषयों की दी जा रही है। जबकि बॉयो और नैनो टेक्नोलॉजी जैसे विषय मालवीय इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट में भी नहीं हैं।
यूनिवर्सिटी के पास यूजीसी और एआईसीटीई के नियमों के अनुसार इन विषयों को पढ़ाने के लिए शिक्षक तक नही हैं जबकि इन विषयों को पढ़ाने के लिए न्यूनतम योग्यता एम.टेक पीएचडी होनी चाहिए। इसी प्रकार पोद्दार कॉलेज में दो सेल्फ फाईनेसिंग कोर्स में अयोग्य शिक्षक पढ़ा रहे हैं। वहीं पांच वर्षीय लॉ में निदेशक एम.कॉम पीएचडी तो है लेकिन एलएलबी नहीं है। गेस्ट फैकल्टी या तो अयोग्य हैं या नियमित शिक्षक ही गेस्ट फैकल्टी के तौर पर पढ़ाते हैं, जबकि यह यूजीसी नियमों के खिलाफ है। नियमित शिक्षकों को गेस्ट फैकल्टी के लिए करोड़ों रुपयों का भुगतान दिया जाता है।