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पीड़िता की उम्र 16 साल से अधिक, 24 साल बाद सजा का आदेश रद्द

Sat, 08 Jul 2017 09:09 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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राजस्थान हाईकोर्ट ने 1989 में अपहरण और दुष्कर्म के मामले में निचली अदालत के 24 साल पुराने आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 16 से अधिक थी, ऐसे में उसे आईपीसी की धारा 376(6) के तहत दोषसिद्ध नहीं किया जा सकता।
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न्यायाधीश महेन्द्र माहेश्वरी की एकलपीठ ने यह आदेश 24 साल से लंबित अभियुक्त हंसराज की ओर से दायर आपराधिक अपील याचिका का निस्तारण करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता और पीड़िता घटना से पूर्व मिलते थे और इस बात को पीड़िता ने अपने माता-पिता से भी छिपाया। इससे साबित होता है कि पीड़िता अपनी सहमति से गई थी और जिन परिस्थितियों में वह याचिकाकर्ता के साथ रही थी, वहां उसके साथ बनाए संबंधों को इच्छा के विपरीत नहीं कहा जा सकता।

याचिका में अधिवक्ता मोहित बलवदा ने अदालत को बताया कि निचली अदालत में सुनवाई के दौरान पीड़िता की उम्र को लेकर कोई दस्तावेज पेश नहीं किए गए थे। चिकित्सक ने निचली अदालत में दिए बयानों में पीड़िता की उम्र 16-17 साल बताई थी। इसके साथ ही चिकित्सक ने यह भी स्वीकार किया था कि इस आयु में दो साल कम या अधिक हो सकती है।
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यह है पूरा मामला

डेमो इमेज - फोटो : Internet
मामले के अनुसार 12 अगस्त 1989 को जुगलाल ने बुहाना में रिपोर्ट दर्ज की थी रात को पडौस में रहने वाले हंसराज व अन्य लोगों ने उसकी 16 वर्षीया पुत्री का अपहरण कर लिया। घटना के बाद पुलिस ने हंसराज को गिरफ्तार किया। वहीं निचली अदालत ने 24 सितंबर 1993 को हंसराज को अपहरण और दुष्कर्म का अभियुक्त मानते हुए सात साल की कठोर सजा सुनाई। इस आदेश के खिलाफ हंसराज की ओर से हाईकोर्ट में अपील की गई। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को बरी करते हुए निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है।
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