कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा से यह सुनिश्चित हो गया है कि कांग्रेस देश में अब राजनीतिक नैरेटिव सेट कर रही है। इसके साथ ही पार्टी ने भाजपा को कांग्रेस की पिच पर खेलने के लिए मजबूर कर दिया है।
क्या कांग्रेस अगले साल इस तरह की एक और यात्रा कर सकती है ? इस सवाल के जवाब में जयराम रमेश ने कहा कि मैं निश्चित रूप से पोरबंदर (गुजरात) से परशुराम कुंड (अरुणाचल प्रदेश) यात्रा में शामिल होना पसंद करुंगा। क्या हम ये यात्रा अगले साल कर सकते हैं और कैसे कर सकते हैं। इसपर चर्चा और बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से राजनीतिक विमर्श को एक नई दिशा दी है और कांग्रेस ने पिछले 100 दिनों में राजनीति की नैरेटिव सेट की है। कांग्रेस की सराहना, आलोचना, प्रशंसा की गई। पार्टी को गाली दी गई। इसका मतलब यह है कि हम बचाव की मुद्रा में थे। भाजपा जो कह रही थी, हम उसका विरोध कर रहे थे। भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से मुझे लगता है कि हम राजनीतिक नैरेटिव को शर्तों पर निर्धारित करने में काफी सफल हुए हैं।
राहुल गांधी कांग्रेस के वैचारिक आधार को कर रहे तेज
यह पूछे जाने पर कि क्या राहुल गांधी अब पार्टी के विवेक-रक्षक हैं। इसपर रमेश ने कहा कि यह एक कड़ा शब्द है और कोई केवल एक यात्रा से विवेक-रक्षक के रूप में नहीं उभर सकता है। राहुल गांधी ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं, जो भारतीय नागरिकों के लिए गहरी चिंता का विषय होना चाहिए। उन्हें निश्चित रूप से कांग्रेस पार्टी में वैचारिक कम्पास के रूप में देखा जाता है। हमारे पास पूर्णकालिक निर्वाचित कांग्रेस अध्यक्ष हैं और राहुल गांधी कांग्रेस के वैचारिक आधार को तेज करने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस के कोसने वाली आवाज हुई नरम
जयराम रमेश ने अनावश्यक रूप से कांग्रेस की आलोचना करने वालों की कोसा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को कोसना न केवल दक्षिणपंथी बल्कि उदारवादी टिप्पणीकारों का भी पसंदीदा शगल है। जयराम रमेश ने कहा कि 'मुझे लगता है कि इसे रोकने की जरूरत है। काफी हद तक भारत जोड़ो यात्रा की वजह से कांग्रेस को कोसने के स्वर में नरमी आई है। मुझे नहीं लगता कि यह गायब हो गया है, लेकिन यह स्वर में नरम हो गया है।'