जयपुर ग्रेटर नगर निगम की महापौर पद के लिए गुरुवार को वोटिंग जारी थी। दोनों ही प्रमुख पार्टियों- भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने पार्षदों की बाड़ेबंदी तक कर रखी थी। इस बीच राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश से न केवल राज्य सरकार की किरकिरी हो गई, बल्कि सौम्या गुर्जर फिर से महापौर बन गई।
गुरुवार को जयपुर ग्रेटर नगर निगम के महापौर पद के लिए भाजपा से रश्मि सैनी और कांग्रेस की हेमा सिंघानिया के बीच मुकाबला था। पार्षदों ने अपने वोट दे दिए थे। मतगणना भी हो चुकी थी। नतीजे रुके हुए थे। इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 27 सितंबर 2022 के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सौम्या गुर्जर को बर्खास्त किया गया था। इस आदेश की वजह से ही चुनाव की नौबत आ गई थी।
सौम्या को सुनवाई का मौका दें
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि वह 10 अगस्त 2022 को न्यायिक जांच रिपोर्ट के मामले में सौम्या को सुनवाई का मौका दें। इसके बाद ही कोई आदेश जारी करें। कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि जब बर्खास्तगी का आदेश ही रद्द हो गया है तो महापौर की कुर्सी खाली नहीं है। ऐसे में नए महापौर के चुनाव की आवश्यकता ही नहीं है।
सौम्या ने दी थी सरकारी आदेश को चुनौती
राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस महेंद्र गोयल का आदेश सौम्या गुर्जर की याचिका पर आया। सौम्या ने महापौर पद से हटाने, छह साल के लिए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित करने और वार्ड में उपचुनाव कराए जाने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी थी।