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चुनाव आयोग के लिए सिरदर्द बन रही राजनीतिक दलों की बढ़ती संख्या

Fri, 14 Sep 2018 04:08 PM IST
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
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राजनीतिक दल
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भारत एक विकासशील देश है और लगातार तेजी से आगे बढ़ रहा है लेकिन उससे कहीं ज्यादा तेजी से यहां के राजनीतिक दलों की संख्या में इजाफा हो रहा है। नीतिशास्त्र में निपुण राजनेताओं के दलों की बढ़ती संख्या अब चुनाव आयोग के लिए सिरदर्द बनती जा रही है।

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इसके पीछे का कारण है कि राजनीतिक दल के पंजीयन का अधिकार तो चुनाव आयोग के पास है लेकिन इनकी मान्यता रद्द करने का अधिकार नहीं है। चुनाव आयोग इस संबंध में कई बार सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दे चुका है लेकिन अभी तक इस पर कोई निर्णय सामने नहीं आया है। 

इसका परिणाम यह हुआ कि सात मुख्य राष्ट्रीय पार्टियों को मिलाकर राजनीतिक दलों की संख्या 2100 के करीब पहुंच चुकी हैं। दुनिया में शायद ही कोई दूसरा लोकतांत्रिक देश होगा जहां राजनीतिक दलों की संख्या इतनी तेजी से आगे बढ़ रही हो।
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चुनाव आयोग के लिए दिक्कत उस समय होती है जब ऐसी पार्टियां भी पंजीयन करा लेती हैं जिनको 100 वोट भी हासिल करने में दिक्कत आती है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस प्रकार के राजनीतिक दलों के अस्तित्व से देश को क्या लाभ हो रहा है।

मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम जैसे राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। जल्द ही कोई कदम नहीं उठाया गया तो यह संख्या और तेजी से बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

इस संबंध में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक दलों के पंजीकरण को लेकर जानकारी दी गई और कहा गया कि इनकी मान्यता रद्द करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है जो कि उसे दिया जाना चाहिए।

मध्यप्रदेश में 1951 में पहला विधानसभा चुनाव हुआ था उस दौरान राजनीतिक दलों की संख्या मात्र 13 थी, लेकिन पिछले विधानसभा चुनावों में यह संख्या बढ़कर 66 पहुंच चुकी थी। वहीं राजस्थान की बात की जाए तो पिछले विधानसभा चुनाव में 56 दलों ने भाग लिया था लेकिन इनमें से पांच को ही सफलता हासिल हुई थी।

छत्तीसगढ़ वर्ष 2000 में अस्तित्व में आया लेकिन वहां भी दलों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है।  

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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