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कैदियों के फरार होने के मामले पर हाईकोर्ट हुआ सख्त,पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

Mon, 29 May 2017 06:45 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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Demo Pic - फोटो : google
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राजस्थान हाईकोर्ट ने सजायाफ्ता कैदियों के पैरोल लेकर फरार होने के मामले में डीजी जेल को राज्य सरकार की ओर से बनाए गए तंत्र का नोडल अधिकारी बनाया है। अदालत ने कहा है कि डीजी जेल फरारी रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए। इसके साथ ही अदालत ने इस संबंध में लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान को निस्तारित कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नन्द्राजोग और न्यायाधीश एसपी शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश की गई।
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सरकार की ओर से एएजी जीएस गिल ने अदालत को बताया कि अभियुक्त के फरार होने पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी के प्रयास किए जाएंगे। पुलिस की अपराध शाखा इस संबंध में नियमित रूप से हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट देगी।

सरकार की ओर से कहा गया कि फरार हुए हार्डकोर अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए संबंधित पुलिस अधीक्षक विशेष टीम का गठन करेंगे और अभियुक्त पर इनाम घोषित करेंगे। इसके अलावा ऐसे अभियुक्तों को भगौड़ा घोषित करवाकर उसकी संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी की जाएगी।
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एएजी ने अदालत को यह भी बताया कि संबंधित अभियुक्त की जमानत देने वाले व्यक्ति से अभियुक्त की उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाएगी। इसके अलावा पुलिस मुख्यालय में हर माह के प्रथम शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से समन्वय स्थापित किया जाएगा।

राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि कुल फरार अभियुक्तों में से 25 फीसदी अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं। राज्य सरकार की ओर से पेश रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए अदालत ने डीजी जेल को सरकार की ओर से विकसित किए तंत्र का नोडल अफसर बनकर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
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