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Politics: योगी के मंत्री ने शिवलिंग के पास धोया हाथ, उदयनिधि मारन मामले पर भाजपा का तेवर पड़ा ठंडा

अमित शर्मा
Updated Mon, 04 Sep 2023 08:39 PM IST

सार

Politics: योगी आदित्यनाथ सरकार के एक मंत्री सतीश शर्मा का बाराबंकी के एक शिव मंदिर में शिवलिंग के करीब हाथ धुलने का मामला सामने आने से भाजपा बैकफुट पर आ गई है। अब उदयनिधि मारन पर उसके हमलों में आक्रामकता कम हो गई है।
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उदयनिधि स्टालिन, Udhayanidhi Stalin - फोटो : Twitter

उदयनिधि मारन ने सनातन धर्म के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी कर भाजपा को एक बड़ा राजनीतिक हथियार उसके हाथ में थमा दिया था। पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर इसे इंडिया गठबंधन के नेताओं का मूल चरित्र बताकर विपक्षी दलों को घेरने में जुटी थी। लेकिन इसी बीच योगी आदित्यनाथ सरकार के एक मंत्री सतीश शर्मा का बाराबंकी के एक शिव मंदिर में शिवलिंग के करीब हाथ धुलने का मामला सामने आने से भाजपा बैकफुट पर आ गई है। अब उदयनिधि मारन पर उसके हमलों में आक्रामकता कम हो गई है। वहीं, विपक्ष पूरी मजबूती से इसे भाजपा का असली चरित्र बताने में जुट गया है। 

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उदयनिधि स्टालिन, Udhayanidhi Stalin - फोटो : Twitter
उदयनिधि मारन ने सनातन धर्म के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी कर भाजपा को एक बड़ा राजनीतिक हथियार उसके हाथ में थमा दिया था। पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर इसे इंडिया गठबंधन के नेताओं का मूल चरित्र बताकर विपक्षी दलों को घेरने में जुटी थी। लेकिन इसी बीच योगी आदित्यनाथ सरकार के एक मंत्री सतीश शर्मा का बाराबंकी के एक शिव मंदिर में शिवलिंग के करीब हाथ धुलने का मामला सामने आने से भाजपा बैकफुट पर आ गई है। अब उदयनिधि मारन पर उसके हमलों में आक्रामकता कम हो गई है। वहीं, विपक्ष पूरी मजबूती से इसे भाजपा का असली चरित्र बताने में जुट गया है। 

कांग्रेस ने इस पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सतीश शर्मा शिवलिंग के पास हाथ धुल रहे हैं। भाजपा के एक और ब्राह्मण नेता जितिन प्रसाद भी साथ खड़े हैं। पार्टी ने ट्वीट कर कहा है कि धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले इन लोगों को यह भी पता नहीं है कि शिवलिंग के पास हाथ नहीं धोया जाता। उसने इसे भाजपा के धर्म की असलियत बताया है। समाजवादी पार्टी ने भी यह प्रश्न खड़ा किया है कि यदि यही काम किसी दूसरी जाति के नेता ने किया होता तो क्या होता। यह मामला सामने आने के बाद भाजपा बैकफुट पर है।

क्यों उलटा पड़ा दांव
दरअसल, भाजपा सदैव हिंदुत्व की राजनीति करते हुए अपने कोर वोट बैंक को लगातार मजबूत करने का काम करती रही है। इस बार पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव और आगामी लोकसभा चुनाव के बीच राम मंदिर के उद्घाटन के समाचारों को उछाल कर वह हिंदू वोटरों को अपने करीब लाने की कोशिश कर रही है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिल्ली आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राम मंदिर के उद्घाटन करने का औपचारिक निमंत्रण देने का समाचार भी इसी रणनीति का हिस्सा था।जिस समय भाजपा इस मुद्दे को उछाल कर हिंदू मतदाताओं पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, उसी बीच डीएमके नेता उदयनिधि मारन ने सनातन धर्म की एक बीमारी से तुलना कर नया विवाद पैदा कर दिया। भाजपा ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया और कहा कि यह इंडिया गठबंधन की सच्चाई है। उसके नेता हिंदुओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते रहे हैं। 
 

पार्टी ने इस मुद्दे के सहारे कांग्रेस को भी घेरने की कोशिश की और कहा कि राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेता इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैंं। उन्हें बताना चाहिए कि जो लोग भी हिंदुओं-सनातन धर्म का अपमान कर रहे हैं, वे उनके साथ क्यों खड़े हैं। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी से इस मुद्दे पर सफाई देने की मांग की। लेकिन, इसी बीच सतीश शर्मा का प्रकरण सामने आ गया। इससे भाजपा का कांग्रेस पर न केवल हमला कमजोर पड़ गया, बल्कि उसने विपक्षी दलों को भी भाजपा को घेरने का बड़ा अवसर दे दिया।
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