तारीफ भी...बीते वर्षों में स्वास्थ्य सेवा में सुधार
- डब्ल्यूएचओ ने कहा कि सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं वर्तमान में वित्तीय संकट का भी सामना कर रहीं हैं जो राष्ट्रीय और राज्य दोनों ही स्तर पर चिंता का कारण है। एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के महानिदेशक डॉ. गिरधर ज्ञानी का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में स्वास्थ्य को लेकर भारत ने काफी तरक्की की है।
- अगर वर्ष 2000 के बाद से अब तक की स्थिति देखें तो देश में स्वास्थ्य क्षेत्र का काफी विस्तार भी हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, सच यह भी है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए अब भी बहुत कुछ होना बाकी है, क्योंकि बीते दो वर्षों में पूरे देश ने महामारी के आगे कमजोर स्वास्थ्य तंत्र का अनुभव भी किया है।
...पर, हृदय रोग, सीओपीडी और स्ट्रोक बने सबसे ज्यादा जानलेवा
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दो साल से कोरोना महामारी का मुकाबला कर रहा भारत बीमारियों का दोहरा बोझ झेल रहा है। समय के साथ देश की बढ़ती आबादी के चलते मिश्रित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली देखने को मिल रही है, जो जमीनी स्तर पर चुनौतियों को और गंभीर बना रही है।
डब्ल्यूएचओ ने भारत में राष्ट्रीय और अलग-अलग राज्यों के स्तर पर जब स्वास्थ्य समीक्षा की तो पाया कि देश में साल 2019 के दौरान सबसे ज्यादा मौतें तीन बड़ी बीमारियों की वजह से हुईं जिनमें हृदय रोग, सीओपीडी या क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और स्ट्रोक शामिल हैं। कोरोना महामारी जैसे संक्रामक रोग के साथ भारत में काफी तेजी से गैर संचारी रोग (एनसीडी) बढ़ते जा रहे हैं जिन्हें लेकर जागरूकता, जांच, उपचार पर अभी से जोर देना बहुत जरूरी है।
जीवन प्रत्याशा में भी आया सुधार...47.7 से बढ़कर 69.6 वर्ष हुई
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय लोगों की जीवन प्रत्याशा में बढ़ोतरी हुई है। साल 1970 में जीवन प्रत्याशा 47.7 वर्ष अपेक्षित थी जो साल 2020 में बढ़कर 69.6 वर्ष हुई। इसके अलावा साल 2003 से अब तक मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को लेकर भी तेजी से सुधार दर्ज किया गया। प्रति एक लाख प्रसूति पर यह दर 301 से घटकर 130 रह गई। वहीं शिशु मृत्युदर भी प्रति एक हजार शिशु पर 68 से घटकर 24 रह गई है।