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Oil Price: इस कदम से रुक जाएगा खाने के तेल की बढ़ती कीमतों का खेल, ऐसे त्योहारी सीजन में काबू में रहेंगे रेट

Wed, 18 Sep 2024 01:20 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

खाद्य मंत्रालय का कहना है कि कम शुल्क पर आयातित तेल आसानी से 45-50 दिनों तक चलेगा। इसलिए कंपनियों को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) बढ़ाने से बचना चाहिए।
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महंगाई पर लगाम लगाने की तैयारी - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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खाद्य तेलों में आयात शुल्क में बढ़ोतरी के बाद कई राज्यों में पुराने स्टॉक में मुनाफाखोरी का खेल शुरू हो गया है। कई शहरों के थोक बाजार के कारोबारियों ने सोया और राइस ब्रान जैसे तेल में 20 रुपए प्रति लीटर तक का इजाफा कर दिया है, जबकि खुदरा दुकानदारों ने कीमत में 30 रुपए का इजाफा कर दिया है। जो सोया तेल बीते शुक्रवार को थोक में 100 रुपए और खुदरा में 110 रुपए था, वह अब 140-150 रुपए में बेचा जा रहा है।

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इस बीच तेल होते खेल को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक्शन लिया है। सरकार ने खाद्य तेल कंपनियों से कहा है कि वह तेल का खुदरा मूल्य न बढ़ाएं। क्योंकि सरकार को ऐसी पूरी आशंका थी कि कंपनियां इस शुल्क का बोझ आम नागरिकों पर ट्रांसफर कर देंगी। सरकार ने साथ ही कंपनियों से कहा है कि उनके पास पहले से सस्ते आयात शुल्क के साथ मंगाया पर्याप्त खाद्य तेल है।

खाद्य मंत्रालय का कहना है कि कम शुल्क पर आयातित तेल आसानी से 45-50 दिनों तक चलेगा। इसलिए कंपनियों को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) बढ़ाने से बचना चाहिए। मंगलवार को खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए), इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईवीपीए) और सोयाबीन ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (एसओपीए) के प्रतिनिधियों के साथ मूल्य निर्धारण रणनीति पर चर्चा करने के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की।
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सरकार का कहना है कि इस बैठक में प्रमुख खाद्य तेल संघों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि जब तक 0 प्रतिशत और 12.5 प्रतिशत मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) पर मंगाया गया खाद्य तेल स्टॉक में है तब तक प्रत्येक तेल का एमआरपी बरकरार रखा जाए और अपने सदस्यों के साथ इस मुद्दे को तुरंत उठाया जाए।अभी कम शुल्क पर आयातित खाद्य तेलों का करीब 30 लाख टन स्टॉक है जो 45 से 50 दिनों की घरेलू खपत के लिए पर्याप्त है।

दरअसल, भारत घरेलू मांग को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में खाद्य तेलों का आयात करता है। आयात पर निर्भरता कुल आवश्यकताओं का 50 प्रतिशत से अधिक है। खाद्य मंत्रालय ने कहा कि आयात शुल्क बढ़ाने का निर्णय घरेलू तिलहन (जिन फसलों से खाद्य तेल निकलता है) किसानों को बढ़ावा देने के लिए सरकार के चल रहे प्रयासों का हिस्सा है।
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