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2014 में धर्म ने जाति को तोड़ा था, क्या इस चुनाव में जाति को तोड़ सकेगा राष्ट्रवाद

Wed, 01 May 2019 12:30 PM IST
Avdhesh Kumar विजय विद्रोही, नई दिल्ली
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मतदान केंद्र के बाहर खड़े मतदाता(File Photo) - फोटो : अमर उजाला
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चार चरण का चुनाव पूरा हो चुका है। 373 सीटों के लिए वोट डाले जा चुके हैं। अभी करीब 170 सीटों पर चुनाव बाकी है। पिछले चार महीने उत्तर भारत में भटकने के बाद कुछ बातें साफ हैं। आगे अपनी चुनावी यात्रा में लोगों के साथ हुई दिलचस्प बातों मुलाकातों की बात करेंगे, लेकिन पहले देखते हैं कौन-कौन सी बातें साफ हैं। एक, पूरा चुनाव राष्ट्रवाद और जातिवाद के बीच झूल रहा है। जहां-जहां राष्ट्रवाद हावी है, वहां-वहां भाजपा जीत रही है। दो, जहां-जहां पूरी तरह से जातिवाद हावी है और मुस्लिम वोटर बीस फीसद से ज्यादा हैं, वहां-वहां भाजपा हार रही है। तीन, जहां कुछ-कुछ राष्ट्रवाद और कुछ-कुछ जातिवाद है, लेकिन मुस्लिम वोट दस फीसद के आसपास है वहां या तो भाजपा जीत रही है या फंसी हुई ऐसी सीटों में भाजपा को बढ़त हासिल है।
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बाड़मेर पाकिस्तान की सीमा से सटा राजस्थान का जिला है। वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा हो रही थी। मोदी ने भाषण में कहा कि पाकिस्तान हर बार परमाणु बमों का डर दिखाता था, लेकिन इस बार हमने इसकी परवाह नहीं करते हुए घुसकर मारा। अरे हमने क्या परमाणु बम दिवाली पर फोड़ने के लिए रखे हैं। इस पर पूरे पांडाल में तालियां गूंजीं... लोग उठकर नाचने लगे। मैं प्रेस दीर्घा में बैठा था। 

वहां भी पत्रकार खड़े होकर तालियां बजाने लगे थे। रैली खत्म होने के बाद कुछ लोगों से बात हुई। श्रवण सिंह से मैंने पूछा कि अकाल और पानी की किल्लत से जूझते बाड़मेर में पानी मुद्दा है या पाकिस्तान और परमाणु बम। उसका जवाब था... पानी तो तब पीएंगे जब देश बचेगा। जब देश ही नहीं बचेगा तो पानी का क्या करेंगे। मोदीजी ही देश बचाएंगे। 
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पास खड़े लोगों ने उसका समर्थन किया। मैंने पूछा कि देश तो बचा हुआ है। उसका कहना था कि देश बचा हुआ है क्योंकि मोदीजी हैं। मोदीजी गए तो देश भी गया। इसके साथ ही मोदी-मोदी के नारे लगने लगे। बाड़मेर से जैसलमेर की तरफ निकले। रास्ते में एक जगह चाय पीने रुके। चाय की थड़ी पर बैठे लोगों का कहना था कि भले ही खेत सूखा रहे, लेकिन देश पहले है। पाकिस्तान का मुकाबला तो मोदी ही कर सकते हैं। चाय पीकर उठे तो बस का इंतजार करता एक युवक मिला। 

24 साल का रोहित बेरोजगार था। उसका कहना था कि वैसे तो उसके लिए नौकरी ही बड़ा मुद्दा है, लेकिन अगर बात देश की आती है तो वो मोदी को पांच साल देने को तैयार हैं। जोधपुर के पास एक गांव की महिला का कहना था कि मोदीजी को वोट देना है क्योंकि देश को आजाद करना है। उसकी बात पर आसपास के ग्रामीण हंस पड़े कहने लगे कि देश तो पहले से ही आजाद है। इस पर महिला ने अपनी झेंप मिटाते हुए कहा कि उसका कहना है कि मोदीजी ही सब कुछ ठीक करेंगे।

पानी मुद्दा है या पाकिस्तान और परमाणु बम। उसका जवाब था... पानी तो तब पीएंगे जब देश बचेगा। 

मोदीजी ने बाड़मेर की रैली में परमाणु बम वाला बयान दिया था। बाड़मेर से सटा है जैसलमेर जिला, जहां पोकरण है। पोकरण में ही भारत ने 1974 और 1998 में परमाणु परीक्षण किए थे। पोकरण में घुसते ही मिठाई की दुकान है। राकेशजी की। चमचम नाम की मिठाई ये बनाते हैं, जिसे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तक को खिला चुके हैं। बताने लगे कि कैसे 1974 और 1998 के परमाणु परीक्षण के समय धूल का गुबार उठा था, घरों में दरारें तक पड़ गयी थीं। कहने लगे कि पोकरण का नाम तो दुनिया भर में हो गया, लेकिन पोकरण पानी के लिए तरस रहा है। इसके बाद 'प' का पहाड़ा सामने रखा। प से पानी चाहिए, प से पाकिस्तान या प से परमाणु बम नहीं। पर प से प्रचार में प से पॉलिटिक्स हो रही है। 

टोंक जिले में मालपुरा के आगे टूटी सड़क पर कूदते फांदते एक गांव में पहुंचे तो वहां एक किराने की दुकान पर लिखा था प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित। जिज्ञासा हुई कि आखिर आवास योजना के तहत दुकान कैसे खुल सकती है। दुकानदार से मिले तो कहने लगा कि पीछे के हिस्से में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनवा लिया और जेब से कुछ पैसे मिलाकर आगे दुकान खोल ली। एक पंथ दो काज हो गए। तब तो मोदीजी को एक नहीं दो वोट मिलेंगे, मैंने हंसते हुए कहा तो दुकानदार ने हंसते हुए जवाब दिया कि पत्नी लड़ाई करके मायके चली गई है। चुनाव तक लौट आई तो मोदीजी को दो वोट पक्के।

खैर दुकान से बाहर निकलते ही दुकानदार ने साथ बैठे साथी से कहा कि ये देखो मोदीजी का काम। दिल्ली से भेजा है ...(हमारा गाड़ी का दिल्ली नंबर था) आवास योजना की जानकारी लेने के लिए। मैंने पलट कर कहा कि हमें मोदीजी ने नहीं भेजा है, हम तो चैनल वाले हैं। इस पर दुकानदार का कहना था कि मोदी ने भेजा या चैनल वाले हो ...एक ही बात है। 

पटना में पटना साहिब गुरुद्वारे के बाहर घड़ी की दुकान करने वाले का कहना था कि वक्त मोदी का ठीक चल रहा है और पाकिस्तान का खराब चल रहा है। मोदीजी ने पाकिस्तान को उसके घर में घुसकर मारा और दिल खुश कर दिया। हालांकि कैमरा बंद होने पर जीएसटी के नुकसान बताने लगे थे। 
 
कुल मिलाकर निचोड़ और सच्चे किस्से बताते हैं कि किस तरह भाजपा का नेटवर्क गांव गांव में काम कर रहा है ...  कि अगर मोदीजी फिर प्रधानमंत्री नहीं बने तो कैसे पाकिस्तान भारत के लिए खतरा बन जाएगा ...लोगों को बताया जा रहा है कि कैसे मोदी ने पाकिस्तान को उसके घर में घुसकर मारा और कैसे पाकिस्तान दुनिया भर में भीख मांगता घूम रहा है। अब उस महिला को क्या कहा जाए जो समझ रही है कि देश को आजाद करना है और मोदीजी को वोट देना है। अलबत्ता इसी गांव में एक घर से देसी छाछ पीने का न्योता मिला। गांव की छाछ सुनकर मना नहीं कर सके। घर के अंदर पहुंचे। 
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कुछ बोलना नहीं है और चुपचाप वोट देकर आना है

वहां साठ साल की एक महिला रामवती का कहना था कि मनरेगा में मजदूरी नहीं मिल रही, गैस का सिलेंडर महंगा हो गया है लेकिन वोट मोदी को ही देना है। क्यों... इसलिए कि मोदी ने शादी वादी की नहीं, बाल बच्चे हैं नहीं और पूरा समय देश को दे रहा है। रामवती की बात सुनकर बिहार के हाजीपुर का किस्सा याद आ गया। वहां बाजार में घूमते हुए और लोगों से बातें करते हुए एक शख्स से मुलाकात हुई। कहने लगा कि हम भी कुछ बोलेंगे। मौका दिया बोलने का तो लगे मोदीजी की तारीफ करने। बात खत्म करने के बाद उस शख्स ने मुझसे पूछा कि क्या कैमरा बंद हो गया। मैंने कहा कि हां तो कहने लगे कि भाषण देते समय सच झूठ का भेद भूल जाते हैं लेकिन चलो देश का नाम तो ऊपर किया है।

... लेकिन यूपी के बिजनौर से लेकर बागपत, अमरोहा, बदायूं, मेरठ तक में मुस्लिम वोटर ऐसा नहीं मानते। बिजनौर में अखलाक ने कहा कि एक वोट खराब नहीं होने देना है। कुछ बोलना नहीं है और चुपचाप वोट देकर आना है। अमरोहा में ढोलकी बहुत बनती हैं। ऐसी ही एक दुकान पर गए तो दुकानदार आलम ने ढोलक बजाने के तरीके से अपने दिल की बात कही। पूछा कि चुनाव में किसकी खनक है तो जोर-जोर से ढोलक बजाने लगे। फिर पूछा कि क्या अच्छे दिन आए तो ढोलक पर बेहद हल्की और थकी हुई सी थाप देने लगे। 

कन्नौज में शहर के मुख्य गेट पर कुछ जाटव मिले। बात शुरू हुई तो दिल का दर्द सामने आया। कहने लगे कि कैसे वोट दे दें यादवों को। ये लोग बहन-बेटियों के साथ छेड़छाड़ करते हैं, तंग करते हैं। कुछ कुरेदा तो एक ने बोल ही दिया ...अब बहिनजी यहां आकर रैली करेंगी और उसमें डिंपल यादव को वोट देने को कहेंगी तो देना ही पड़ेगा। महागठबंधन का एक जमीनी सच यह भी है।

अंत में एक पुराना किस्सा याद आता है। राजस्थान के मुख्यमंत्री राजस्थान के पाली जिले के बाली से विधानसभा का उपचुनाव लड़ रहे थे। अमृत नाम के संघ प्रचारक उनके खिलाफ मैदान में उतर गए। कहानी दिलचस्प हो गई, लिहाजा कवर करने वहां जाना हुआ। अमृत को सेब चुनाव चिन्ह मिला था। उनका हर जगह सेब की माला से स्वागत होता था। उनका इंटरव्यू शुरू हुआ तो सेब की माला गले में डाल ली। माला में सात से आठ सेब रहे होंगे। एक-एक सेब दो सौ ग्राम का भी हुआ तो डेढ़ दो किलो का भार। इंटरव्यू लंबा चला तो उम्मीदवार ने कहा कि वो सेब की माला गले से उतारना चाहते हैं क्योंकि गला दर्द करने लगा है। 

मैंने कहा कि चुनाव चिन्ह नहीं संभल रहा, जीत गए तो जनता को क्या संभालेंगे। खैर, चुनाव चल रहा है उम्मीद है कि लोग ऐसे नेताओं को ही वोट देंगे जो उन्हे संभालना भी जानते हों। शुरू में कुछ बातें साफ हुई थीं कि कैसे राष्ट्रवाद के नाम पर भाजपा और जातिवाद प्लस मुस्लिम वोट के नाम पर गैर भाजपा दल जीत रहे हैं, लेकिन यहां ये साफ नहीं है कि आखिर कौन-कौन सी सीटें हैं जहां राष्ट्रवाद हावी रहेगा या फिर जातिवाद ... 2014 में धर्म ने जाति को तोड़ा था लेकिन क्या 2019 में राष्ट्रवाद जाति को तोड़ेगा ...यह बड़ा सवाल है।
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